Friday, May 22, 2026

जेटेट भाषा विवाद पर पांच मंत्रियों की कमेटी में सहमति नहीं बन पायी है.

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रांची: जेटेट 2026 नियमावली में भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली को क्षेत्रीय भाषा की सूची से बाहर किए जाने के विवाद को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा गठित पांच मंत्रियों की कमेटी की दूसरी बैठक भी बेनतीजा समाप्त हो गई. कमेटी 3:2 के अनुपात में विभाजित नजर आई.

कमेटी 3:2 से बंटी, बहुमत शामिल करने के पक्ष में

कांग्रेस कोटे के मंत्री राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह तथा राजद कोटे के संजय प्रसाद यादव ने चारों भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल करने का समर्थन किया. वहीं झामुमो कोटे के मंत्री योगेंद्र प्रसाद और सुदिव्य कुमार सोनू इन भाषाओं को शामिल करने के विरोध में रहे. सूत्रों के अनुसार, कमेटी ने 3:2 के बहुमत से मुख्यमंत्री को सौंपी जाने वाली अपनी अनुशंसा में इन चारों भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने की सिफारिश की है. इससे पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा, देवघर, गोड्डा समेत कई जिलों के भाषा-भाषियों को जेटेट में शामिल होने का अवसर मिल सकेगा.

जनजातीय-अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व का नया विवाद

बैठक की सबसे चर्चित बात यह रही कि झामुमो कोटे के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कमेटी में किसी भी जनजातीय या अल्पसंख्यक समुदाय के मंत्री के ना होने का मुद्दा उठा दिया. इससे एक नया विवाद खड़ा हो गया है.

संयोजक राधाकृष्ण किशोर का बयान

कमेटी के संयोजक और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बैठक के बाद मीडिया से कहा, कि “आज की बैठक दूसरी और अंतिम बैठक थी. अगर मुख्यमंत्री कमेटी में जनजातीय और अल्पसंख्यक समुदाय के मंत्रियों को शामिल करके इसे पुनर्गठित करते हैं, तभी तीसरी बैठक होगी, अन्यथा आज की बैठक अंतिम थी.” उन्होंने कहा कि दो दिनों की बैठक की पूरी कार्यवाही और सभी मंत्रियों के विचारों को शामिल करते हुए रिपोर्ट जल्द मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंप दी जाएगी.

विभागीय अधिकारियों पर नाराजगी

पहली बैठक की तरह दूसरी बैठक में भी कार्मिक एवं शिक्षा विभाग के सचिव पूर्ण जानकारी लेकर नहीं पहुंचे. राज्य में बोली जाने वाली भाषाओं, उन भाषाओं के छात्रों की संख्या और शिक्षकों की उपलब्धता संबंधी आंकड़े नहीं दिए गए. इस पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बैठक के दौरान नाराजगी व्यक्त की.

वर्तमान में कमेटी की अनुशंसा 3:2 के बहुमत से चारों भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में है, लेकिन अंतिम फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को करना है. यदि वे कमेटी का पुनर्गठन करते हैं तो प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, अन्यथा मौजूदा रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा.

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