वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल और घरेलू स्तर पर बढ़ते दबाव के बीच भारतीय रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 44 पैसे टूटकर 96.25 के सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया. ईरान में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर ने उभरते बाजारों की मुद्राओं को गहरे संकट में डाल दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर दिख रहा है.
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, अंतर
बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया आज 96.19 पर खुला और देखते ही देखते यह गिरकर 96.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया पहली बार 96 का आंकड़ा पार करते हुए 95.81 पर बंद हुआ था. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और हॉरमुज जलडमरूमध्य का मार्ग दोबारा नहीं खुलता, तब तक डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक भी गिर सकता है
क्रूड ऑयल और डॉलर इंडेक्स में उछाल
ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा बाजार में 1.83 फीसदी की तेजी के साथ 111.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है. महंगे कच्चे तेल के कारण देश से डॉलर की निकासी तेजी से बढ़ रही है. वहीं, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.32 पर पहुंच गया है, जिससे रुपये पर दबाव दोगुना हो गया है.
सरकार और आरबीआई के कड़े कदम
इस स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार और रिजर्व बैंक (RBI) लगातार सक्रिय कदम उठा रहे हैं. गैर-जरूरी आयातों को रोकने और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए सरकार ने 13 मई को सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क बढ़ाकर 18 प्रतिशत से अधिक कर दिया था. इसके बाद शनिवार को चांदी के आयात पर कड़े प्रतिबंध लगाते हुए इसे लाइसेंस श्रेणी में डाल दिया गया है. राहत की बात यह है कि 8 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.295 अरब डॉलर बढ़कर 696.988 अरब डॉलर पर पहुंच गया है.
शेयर बाजार में हाहाकार
रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखा. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 833 अंक टूटकर 74,404.79 पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 234 अंक गिरकर 23,401.70 पर आ गया. विशेषज्ञों का कहना है कि अल्पावधि में USD/INR के लिए 96.00-96.50 का स्तर एक मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है.


