Sunday, May 17, 2026

इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि देश भर में अब सालाना लगभग 1.4 करोड़ से 1.5 करोड़ AC यूनिट बिकते हैं.

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नई दिल्ली: भारत में चिलचिलाती गर्मी अब सिर्फ मौसमी परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह तेजी से लोगों के जीने, खर्च करने और जिंदा रहने के तरीके को बदल रही है. शहरों, कस्बों और गांवों में, एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर और कूलर रिकॉर्ड तेजी से दुकानों से बिक रहे हैं क्योंकि बढ़ता तापमान और बार-बार आने वाली हीटवेव लाखों भारतीयों को आर्टिफिशियल कूलिंग (कृत्रिम शीतलन) की ओर धकेल रही है.

उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स एवं घरेलू उपकरण निर्माता संघ (CEAMA) द्वारा जारी इंडस्ट्री डेटा, साथ ही IMARC ग्रुप और स्टेटिस्टा (Statista) जैसी रिसर्च एजेंसियों के बाजार अनुमानों से पता चलता है कि पिछले पांच वर्षों में कूलिंग साधनों की बिक्री में काफी बढ़ोतरी हुई है. जिसे कभी लग्जरी खरीदारी माना जाता था, वह अब जिंदा रहने की जरूरत बनता जा रहा है.

AC अब जरूरत, लग्जरी नहीं
सबसे बड़ा बदलाव भारत के एयर-कंडीशनर (AC) बाजार में दिख रहा है. सिर्फ पांच साल पहले, भारत में सालाना AC की बिक्री लगभग 70 से 80 लाख यूनिट थी. आज, यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि अब देश भर में सालाना लगभग 1.4 करोड़ से 1.5 करोड़ AC यूनिट बिकते हैं.

2024 की गर्मियों में, जब पूरे उत्तर और मध्य भारत में बहुत ज्यादा और लंबे समय तक गर्मी रही, लगभग 1.4 करोड़ यूनिट्स की रिकॉर्ड तोड़ बिक्री हुई. हालांकि 2025 की शुरुआत में बेमौसम बारिश ने थोड़ी देर के लिए डिमांड कम कर दी थी, लेकिन कुल मिलाकर डिमांड मजबूत बनी हुई है, जो 1.5 करोड़ यूनिट के आस-पास है. इंडस्ट्री लीडर्स का अब मानना ​​है कि 2030 तक बाजार सालाना 3 करोड़ यूनिट्स तक पहुंच सकता है.

यह चलन एक बड़े सामाजिक बदलाव को दिखाता है. कई शहरी घरों में, खासकर दिल्ली-NCR, मुंबई, अहमदाबाद और दूसरे गर्मी वाले शहरों में, एयर कंडीशनर अब कोई खास प्रोडक्ट नहीं रह गए हैं. परिवार अब इन्हें बहुत ज्यादा गर्मी से बचाने के लिए जरूरी चीज के तौर पर देख रहे हैं.

इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर्स (Electronics Retailers) का कहना है कि ग्राहक भी पहले के मुकाबले तेजी से अपग्रेड कर रहे हैं, विंडो AC से स्प्लिट AC पर शिफ्ट हो रहे हैं और तेजी से इन्वर्टर-बेस्ड, ऊर्जा-दक्ष मॉडल चुन रहे हैं.

गर्मियों में रेफ्रिजरेटर की भारी मांग
रेफ्रिजरेटर भी सबसे अच्छा परफॉर्म करने वाले उपभोक्ता उपकरण श्रेणी में से एक बन गए हैं. इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, भारत में अभी हर साल लगभग 1.3 करोड़ से 1.5 करोड़ रेफ्रिजरेटर यूनिट बिकते हैं. पिछले पांच वर्षों में, यह सेगमेंट लगातार 10% से 12% की सालाना दर से बढ़ा है. दिलचस्प बात यह है कि रेफ्रिजरेटर की सालाना बिक्री का लगभग 50% से 60% हिस्सा मार्च और मई के बीच होता है, जो ज्यादा गर्मियों के महीने होते हैं.

कंपनियों का कहना है कि गांव में डिमांड काफी बढ़ी है, जबकि शहरी उपभोक्ता बेसिक सिंगल-डोर रेफ्रिजरेटर से सैमसंग और LG जैसे ब्रांड के बड़े डबल-डोर और स्मार्ट रेफ्रिजरेटर में अपग्रेड कर रहे हैं.

खुदरा विक्रेता इस वृद्धि का श्रेय न सिर्फ बढ़ती आय को देते हैं, बल्कि बदलती जीवनशैली और बिगड़ती गर्मी की वजह से भी डिमांड बढ़ी है, जिससे गर्मियों के महीनों में भोजन संरक्षण और भी जरूरी हो जाता है.

किफायती कूलिंग लाइफलाइन बने हुए हैं एयर कूलर
AC की बिक्री में तेजी के बावजूद, एयर कूलर भारत के टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण बाजारों में छाए हुए हैं क्योंकि वे बहुत सस्ते हैं और काफी कम बिजली खाते हैं. IMARC ग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एयर कूलर बाजार 2025 तक लगभग 12,610 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है.

पिछले पांच वर्षों में इस सेक्टर में सालाना 12% से 14% की वृद्धि हुई है. क्रॉम्पटन और सिम्फनी जैसे ब्रांड्स ने तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ाई है, और धीरे-धीरे कई इलाकों में स्थानीय और छोटे स्तर के निर्माताओं की जगह ले ली है.

लाखों मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवारों के लिए, कूलर बढ़ते तापमान का सबसे व्यावहारिक उपाय है.

डॉक्टरों ने स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में दी चेतावनी
हालांकि कूलिंग उपकरण लोगों को खतरनाक गर्मी में बचने में मदद कर रहे हैं, लेकिन डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि इनका बहुत ज्यादा और गलत तरीके से इस्तेमाल करने से नई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.

मेदांता में रेस्पिरेटरी और स्लीप मेडिसिन के सीनियर डायरेक्टर डॉ. भरत गोपाल ने कहा कि AC के इस्तेमाल में तेजी से बढ़ोतरी से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल रही है, लेकिन साथ ही बिजली की मांग और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, “इससे जलवायु परिवर्तन होता है और हीटवेव और तेज होती हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि खराब वेंटिलेशन के साथ ज्यादा देर तक घर के अंदर रहने से घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता और सांस की सेहत भी खराब हो सकती है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका समाधान ऊर्जा बचाने वाले उपकरणों, ठीक-ठाक तापमान, नियमित रखरखाव और ऐसे बिल्डिंग डिजाइन के जरिये जिम्मेदार कूलिंग में है, जो घर के अंदर की गर्मी को प्राकृतिक रूप से कम करते हैं.

मेदांता मूलचंद हार्ट सेंटर के डॉ. तरुण कुमार ने कहा कि कूलिंग डिवाइस पर बढ़ती निर्भरता लोगों की प्राकृतिक तापमान में बदलाव को सहने की क्षमता को कम कर रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि ज़्यादा देर तक AC में रहने से गला सूख सकता है, सांस में जलन हो सकती है, एलर्जी हो सकती है, अस्थमा हो सकता है, डिहाइड्रेशन हो सकता है, सिरदर्द हो सकता है, मांसपेशियों में अकड़न हो सकती है और स्किन और आंखों की हालत बिगड़ सकती है.

उन्होंने कहा, “जिन AC यूनिट्स का नियमित रखरखाव नहीं होता, वे धूल के कण, फफूंद और बैक्टीरिया के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड बन जाती हैं.”

पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. मीत घोनिया ने कहा कि डॉक्टरों को खराब कूलिंग सिस्टम के लंबे समय तक संपर्क में रहने से जुड़े मामले तेजी से देखने को मिल रहे हैं. उन्होंने कहा, “गर्मी बढ़ने के साथ, AC और कूलर पर निर्भरता काफी बढ़ गई है. हम खराब हाइड्रेशन की आदतों, आंख सूखने के लक्षणों, एलर्जी, साइनस की समस्याओं और सांस की जलन के कारण डिहाइड्रेशन के ज़्यादा मामले देख रहे हैं.”

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