Monday, April 20, 2026

सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप टैरिफ को असंवैधानिक घोषित करने के बाद, आज से पोर्टल शुरू हो गया है जिससे व्यवसायों को अरबों डॉलर वापस मिलेंगे.

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न्यूयॉर्क: आज यानी सोमवार, 20 अप्रैल 2026 से अमेरिकी व्यापार जगत के लिए एक नई शुरुआत हुई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए उन आयात शुल्कों (Tariffs) की वापसी के लिए आज सुबह 8 बजे से ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया गया है, जिन्हें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ‘असंवैधानिक’ घोषित कर दिया था. इस फैसले से उन लाखों छोटे-बड़े व्यापारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने पिछले वर्षों में सरकार को अरबों डॉलर का टैक्स चुकाया था.

क्या है पूरा मामला?
मामले की जड़ें पिछले साल अप्रैल में जुड़ी हैं, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी व्यापार घाटे को ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ घोषित करते हुए लगभग हर देश से आने वाले उत्पादों पर नए आयात शुल्क लगा दिए थे. इसके लिए उन्होंने 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का सहारा लिया था.

हालांकि, इस फैसले को कानूनी चुनौती दी गई. 20 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस (संसद) की कर-निर्धारण शक्तियों का उल्लंघन किया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के पास एकतरफा इस तरह के कर थोपने का संवैधानिक अधिकार नहीं है.

कितने पैसे की होगी वापसी?
अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) द्वारा कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 3,30,000 आयातकों ने कुल 166 बिलियन डॉलर का टैरिफ चुकाया. यह राशि 5.3 करोड़ शिपमेंट पर आधारित थी. वर्तमान में, लगभग 127 बिलियन डॉलर (ब्याज सहित) की राशि वापसी के लिए तैयार है, क्योंकि 56,000 से अधिक आयातक पहले ही पंजीकरण करा चुके हैं.

रिफंड की प्रक्रिया और चुनौतियां
CBP ने स्पष्ट किया है कि रिफंड की यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी.

  • पोर्टल और पंजीकरण: व्यापारियों को CBP के इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सिस्टम (ACE पोर्टल) पर पंजीकरण करना होगा.
  • सटीकता की शर्त: कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एक भी छोटी गलती पूरे रिफंड आवेदन को खारिज करा सकती है. चूंकि एक फाइल में हजारों प्रविष्टियां (Entries) हो सकती हैं, इसलिए डेटा की शुद्धता अनिवार्य है.
  • समय सीमा: आवेदन स्वीकृत होने के बाद पैसा खाते में आने में 60 से 90 दिन का समय लगेगा.

किसे मिलेगा रिफंड और किसे नहीं?
फिलहाल, रिफंड का पहला चरण केवल उन मामलों के लिए है जहाँ टैरिफ का अनुमान लगाया गया था लेकिन वे ‘फाइनलाइज’ नहीं हुए थे, या जो पिछले 80 दिनों के भीतर के मामले हैं. यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान चीन पर लगाए गए (Section 301) टैरिफ या स्टील और एल्युमीनियम पर लगे टैरिफ फिलहाल इस रिफंड का हिस्सा नहीं हैं.

आम उपभोक्ताओं पर क्या असर होगा?
यह सबसे बड़ा सवाल है. क्या सामान सस्ता होगा या ग्राहकों को उनका पैसा वापस मिलेगा?

व्यवसायों की मर्जी: कानूनी रूप से कंपनियां ग्राहकों को पैसा लौटाने के लिए बाध्य नहीं हैं. कई छोटे व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने टैक्स का बोझ खुद उठाया और कीमतें नहीं बढ़ाईं, इसलिए वे यह पैसा अपने पास रखेंगे.

डिलीवरी कंपनियां: FedEx और UPS जैसी कंपनियों ने सकारात्मक संकेत दिए हैं. फेडएक्स ने कहा है कि जैसे ही उन्हें सरकार से पैसा मिलेगा, वे उसे अपने ग्राहकों को लौटा देंगे.

कानूनी लड़ाई: Costco और EssilorLuxottica (रे-बैन बनाने वाली कंपनी) जैसे बड़े रिटेलर्स के खिलाफ क्लास-एक्शन मुकदमे चल रहे हैं. इनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो मुनाफा इन कंपनियों को रिफंड के तौर पर मिल रहा है, उसका लाभ उन ग्राहकों को भी मिले जिन्होंने महंगी कीमतों पर सामान खरीदा था.

छोटे व्यापारियों की व्यथा
मिनेसोटा के रोचेस्टर में ‘आफ्टर एक्शन सिगार्स’ के सह-संस्थापक ब्रैड जैक्सन जैसे हजारों छोटे उद्यमी इस रिफंड का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. जैक्सन ने बताया कि उन्होंने पिछले साल 34,000 डॉलर का टैरिफ चुकाया था. उनके लिए यह केवल पैसा नहीं, बल्कि उनके व्यवसाय की ‘कैश फ्लो’ की समस्या का समाधान है. हालांकि, उन्हें चिंता है कि 3-4 महीने का लंबा इंतजार उनके जैसे छोटे बिजनेस के लिए बहुत थका देने वाला हो सकता है.

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