नई दिल्ली: भारतीय उद्योग जगत के लिए 17 अप्रैल, 2026 का दिन ऐतिहासिक रहा. अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी एक बार फिर एशिया के सबसे धनी व्यक्ति बन गए हैं. ‘ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स’ द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, गौतम अडानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी को पछाड़कर यह गौरव हासिल किया है.
नेटवर्थ में भारी उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक, गौतम अडानी की कुल संपत्ति बढ़कर 92.6 बिलियन डॉलर हो गई है, जिससे वे विश्व स्तर पर 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं. वहीं, मुकेश अंबानी 90.8 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ वैश्विक रैंकिंग में 20वें स्थान पर खिसक गए हैं. गुरुवार के कारोबारी सत्र में अदाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में आई आक्रामक तेजी ने उनकी संपत्ति में महज एक दिन के भीतर 3.56 बिलियन डॉलर का इजाफा किया.
बाजार का रुख और प्रमुख कारण
अडानी समूह की फ्लैगशिप कंपनियों, जैसे अडानी टोटल गैस, अडानी पोर्ट्स और अडानी पावर के शेयरों में शुक्रवार को भी इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान 3 प्रतिशत तक की मजबूती देखी गई. बाजार विश्लेषकों का मानना है कि बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समूह के रणनीतिक विस्तार ने निवेशकों का भरोसा जीता है. इसके विपरीत, रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रदर्शन में अस्थिरता और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के कारण अंबानी की संपत्ति में इस वर्ष अब तक 16.9 बिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई है.
वैश्विक अमीरों की सूची का हाल
वैश्विक स्तर पर टेस्ला के सीईओ एलन मस्क 656 बिलियन डॉलर की विशाल संपत्ति के साथ शीर्ष पर बने हुए हैं. उनके बाद गूगल के लैरी पेज (286 बिलियन डॉलर) और अमेज़न के जेफ बेजोस का स्थान आता है. रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि 2026 की शुरुआत दुनिया के कई अरबपतियों के लिए नुकसानदेह रही है. बर्नार्ड अरनॉल्ट ने इस वर्ष अब तक सर्वाधिक 44 बिलियन डॉलर की संपत्ति गंवाई है.
भारतीय उद्योगपतियों का दबदबा
अडानी और अंबानी के अलावा, भारतीय उद्योग जगत के अन्य दिग्गज भी वैश्विक सूची में सुदृढ़ स्थिति में हैं. स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल 36.9 बिलियन डॉलर के साथ 62वें स्थान पर हैं, जबकि एचसीएल के शिव नाडर 70वें स्थान पर काबिज हैं. सावित्री जिंदल 32.7 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ देश की सबसे अमीर महिला और वैश्विक स्तर पर 73वें स्थान पर बनी हुई हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि अडानी और अंबानी के बीच संपत्ति का यह अंतर वर्तमान में मात्र 1.8 बिलियन डॉलर का है, जिससे आने वाले हफ्तों में बाजार की चाल के आधार पर शीर्ष स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा और भी रोचक हो सकती है.


