नई दिल्ली: देश के सर्राफा बाजार में आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, देश के 15 प्रमुख बैंकों को 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2029 तक की अवधि के लिए सोना और चांदी आयात करने के लिए अधिकृत किया गया है.
आयात के लिए अधिकृत बैंकों की सूची
सरकार ने बैंकिंग चैनलों के माध्यम से कीमती धातुओं के आयात को औपचारिक बनाने पर जोर दिया है. इस सूची में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक शामिल हैं:
- निजी क्षेत्र: HDFC बैंक, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, इंडसइंड बैंक, फेडरल बैंक, यस बैंक, RBL बैंक और करूर वैश्य बैंक.
- सार्वजनिक क्षेत्र: भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ इंडिया (BOI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB).
- विदेशी बैंक: ड्यूश बैंक और इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (ICBC).
इसके अतिरिक्त, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और रूस के स्बरबैंक को भी अनुमति दी गई है, लेकिन वे इस अवधि के दौरान केवल सोने का ही आयात कर सकेंगे.
रणनीतिक महत्व और पारदर्शिता
सरकार का यह निर्णय मुख्य रूप से अवैध व्यापार और अनियमितताओं को रोकने के लिए लिया गया है. सर्राफा आयात को विनियमित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से रूट करने से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को देश में आने वाले सोने-चांदी की सटीक निगरानी करने में मदद मिलेगी. साथ ही, यह सुनिश्चित होगा कि कीमती धातुओं का प्रवाह केवल वैध और ट्रैसेबल माध्यमों से ही हो.
बाजार की स्थिति और निवेश का नया रुझान
हालिया आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में भारत का स्वर्ण आयात 9 महीने के निचले स्तर ($3.1 बिलियन) पर रहा. इसका प्रमुख कारण मध्य पूर्व में उड़ानों के व्यवधान और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाएं थीं. हालांकि, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट बताती है कि भौतिक सोने की मांग में कमी के बावजूद डिजिटल निवेश में भारी उछाल आया है.
भारतीय निवेशकों का झुकाव अब गोल्ड ETF की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें मार्च 2026 तक लगातार 11 महीनों से शुद्ध निवेश देखा गया है. इसके अलावा, यूपीआई (UPI) के माध्यम से डिजिटल गोल्ड की खरीद भी ₹30.3 बिलियन के पार पहुंच गई है.
आगामी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया जैसे प्रमुख त्योहार से ठीक पहले सरकार का यह कदम सर्राफा बाजार के लिए राहत भरा है. इससे बाजार में सोने-चांदी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी और घरेलू कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है.


