Thursday, April 16, 2026

बिहार सरकार ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने के लिए ‘होम डिलीवरी मुक्त पंचायत’ अभियान का विस्तार किया है।

Share

पटना। बिहार सरकार ने मातृ और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ‘होम डिलीवरी मुक्त पंचायत’ अभियान का दायरा अब और बढ़ाया जाएगा, जिससे सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिल सके।

40% से ज्यादा होम डिलीवरी वाले गांव टारगेट

स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे गांवों की पहचान शुरू कर दी है, जहां 40 प्रतिशत से अधिक प्रसव घरों में हो रहे हैं। इन इलाकों में विशेष अभियान चलाकर अस्पताल में प्रसव के लिए जागरूक किया जाएगा।

आंकड़ों में दिखा सुधार, लेकिन चुनौती बरकरार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में 17 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव हुए। वहीं दिसंबर 2025 तक 13 लाख से ज्यादा प्रसव अस्पतालों में दर्ज किए जा चुके हैं, फिर भी कुछ क्षेत्रों में हालात चुनौतीपूर्ण हैं।

क्यों जरूरी है संस्थागत प्रसव?

अस्पताल में प्रसव होने से गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज, इमरजेंसी सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख मिलती है। इससे मां और नवजात की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।

आशा कार्यकर्ताओं पर बड़ी जिम्मेदारी

अभियान को सफल बनाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारी दी गई है। वे घर-घर जाकर महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए जागरूक करेंगी और अस्पताल जाने के लिए प्रेरित करेंगी।

लक्ष्य साफ: हर पंचायत बने ‘होम डिलीवरी फ्री’

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में अधिक से अधिक पंचायतों को ‘होम डिलीवरी मुक्त’ बनाया जाए। इससे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

Read more

Local News