Friday, April 10, 2026

आरबीआई ने फ्रॉड रोकने के लिए ₹10,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान पर एक घंटे की देरी का प्रस्ताव रखा है.

Share

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा प्रस्ताव रखा है. इसके तहत ₹10,000 से अधिक के डिजिटल भुगतान पर 1 घंटे की देरी या कूलिंग पीरियड अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है.

डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने की तैयारी
RBI ने “एक्सप्लोरिंग सेफगार्ड्स इन डिजिटल पेमेंट्स टू कर्व फ्रॉड्स” नाम से एक डिस्कशन पेपर जारी किया है. इस रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर साल 2025 में ही लगभग 28 लाख डिजिटल फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें लोगों को ₹22,900 करोड़ से अधिक का चूना लगा.

चूंकि UPI और IMPS जैसी प्रणालियों में पैसा तुरंत ट्रांसफर हो जाता है, इसलिए धोखेबाजों से पैसा वापस पाना बेहद मुश्किल होता है. इसी समस्या को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने भुगतान में समय का अंतर रखने का सुझाव दिया है.

RBI के प्रस्ताव की मुख्य बातें
₹10,000 से अधिक के लेनदेन पर ‘होल्ड’
यदि कोई व्यक्ति ₹10,000 से अधिक की राशि किसी नए खाते में ट्रांसफर करता है, तो वह पैसा तुरंत क्रेडिट नहीं होगा. उस पर 1 घंटे का समय लगेगा.

पेमेंट कैंसिल करने का मौका
इस 1 घंटे के दौरान राशि केवल ‘प्रोविजनली डेबिट’ होगी. यदि यूजर को अहसास होता है कि उसके साथ कोई स्कैम या धोखाधड़ी हुई है, तो वह उस ट्रांजेक्शन को रद्द कर सकेगा.

छोटे भुगतानों पर छूट
आम जनता को असुविधा न हो, इसके लिए छोटे अमाउंट के ट्रांजेक्शन पहले की तरह ही पलक झपकते ही पूरे हो जाएंगे. नियमित मर्चेंट पेमेंट और चेक आदि को भी इस नियम से बाहर रखा जा सकता है.

बुजुर्गों के लिए डबल सिक्योरिटी
70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए ₹50,000 से अधिक के पेमेंट पर सेकेंडरी को-ऑथेंटिकेशन (किसी भरोसेमंद व्यक्ति द्वारा मंजूरी) का नियम भी प्रस्तावित है.

इमरजेंसी ‘किल स्विच’
ग्राहकों को एक ऐसा ‘किल स्विच’ देने का भी विचार है, जिसके जरिए वे किसी आपात स्थिति में अपने खाते के सभी डिजिटल पेमेंट चैनलों को एक साथ तुरंत ब्लॉक कर सकें. RBI ने इस चर्चा पत्र पर आम जनता और बैंकिंग क्षेत्र से 8 मई 2026 तक सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद ही अंतिम दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे.

Read more

Local News