अपने भविष्य और रिटायरमेंट को सुरक्षित करना हर कामकाजी व्यक्ति की प्राथमिकता होती है. बाजार में निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन जब बात बिना जोखिम और गारंटीड रिटर्न की आती है, तो ‘पब्लिक प्रोविडेंट फंड’ यानी PPF आज भी भारतीयों की पहली पसंद बना हुआ है. सरकार ने चालू वित्त वर्ष (2026-27) की पहली तिमाही के लिए भी इसकी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे यह 7.1% की आकर्षक दर पर बरकरार है.
कैसे काम करता है 15+5+5 का फॉर्मूला?
PPF की मूल मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है. लेकिन, रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनाने का असली जादू इसके ‘एक्सटेंशन’ (विस्तार) नियम में छिपा है. PPF नियमों के अनुसार, आप 15 साल पूरे होने के बाद इसे 5-5 साल के ब्लॉक में जितनी बार चाहें आगे बढ़ा सकते हैं.
यदि आप ₹61,000 की मासिक आय का लक्ष्य रखते हैं, तो आपको 15+5+5 यानी कुल 25 साल तक निवेश जारी रखना होगा. इस रणनीति के तहत आपको हर साल अधिकतम ₹1.5 लाख (यानी ₹12,500 प्रति माह) जमा करने होंगे.
कैलकुलेशन: ₹37.5 लाख के निवेश पर ₹1.03 करोड़ का फंड
25 सालों के दौरान आपकी कुल जमा राशि ₹37,50,000 होगी. 7.1% की मौजूदा वार्षिक कंपाउंडिंग दर के हिसाब से, इस अवधि में आपको लगभग ₹65.58 लाख केवल ब्याज के रूप में मिलेंगे. इस तरह 25 साल बाद आपका कुल फंड बढ़कर ₹1,03,08,015 हो जाएगा.
₹61,000 की “पेंशन” कैसे मिलेगी?
एक बार जब आपका फंड ₹1.03 करोड़ तैयार हो जाता है, तो आप इसे बिना नया निवेश किए जारी रख सकते हैं. इस स्थिति में, ₹1.03 करोड़ की राशि पर 7.1% की दर से सालाना ब्याज लगभग ₹7.31 लाख बनेगा. यदि आप इस सालाना ब्याज को 12 महीनों में विभाजित करें, तो यह लगभग ₹60,989 (करीब 61 हजार रुपये) प्रति माह होता है. खास बात यह है कि आपका मूलधन (₹1.03 करोड़) बैंक में सुरक्षित रहेगा और आप केवल ब्याज की राशि को पेंशन के रूप में निकाल सकेंगे.
एक्सपर्ट टिप: 5 तारीख का रखें ध्यान
अधिकतम लाभ पाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि हर महीने की 5 तारीख से पहले पैसा जमा कर दें. PPF में ब्याज की गणना महीने की 5 तारीख से आखिरी तारीख के बीच के न्यूनतम बैलेंस पर की जाती है. यदि संभव हो, तो वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल की 5 तारीख तक पूरे साल का ₹1.5 लाख एक साथ जमा करने पर सबसे अधिक ब्याज मिलता है.


