रांची: सीजफायर की घोषणा से वैश्विक स्तर पर कुछ राहत मिली है, लेकिन ईरान, इजरायल और अमेरिका के रुख से शांतिवार्ता के आसार कम दिख रहे हैं. खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण घरेलू गैस की किल्लत के बाद अब फर्टिलाइजर की उपलब्धता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. झारखंड समेत पूरे देश में यूरिया और डीएपी का भारी इस्तेमाल होता है. केंद्र सरकार द्वारा झारखंड की मांग को पूरी तरह ठुकराए जाने से आने वाले समय में यूरिया की कमी होने की आशंका जताई जा रही है.
झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट कहा है कि यह कमी अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और केंद्र से कोटे के अनुसार आपूर्ति न मिलने के कारण हो रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि खरीफ मौसम में किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
वित्त मंत्री ने कहा ये केंद्र की जिम्मेदारी
जब ईटीवी भारत ने इस मुद्दे पर राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने साफ कहा- “यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है. पेट्रोकेमिकल उत्पाद ज्यादातर खाड़ी देशों से ही आते हैं. मई महीने से गैस सिलेंडर के साथ-साथ यूरिया को लेकर भी परेशानी बढ़ने वाली है.”
यूरिया की कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देश
राज्य सरकार ने यूरिया की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए हैं. कृषि विभाग ने सभी जिला पदाधिकारियों को पत्र भेजकर कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए हर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. विभागीय जानकारी के अनुसार, झारखंड को खरीफ सीजन के लिए 1.9 लाख मीट्रिक टन यूरिया की मांग थी, लेकिन केंद्र ने इसमें काफी कटौती कर दी है, जिससे राज्य को पर्याप्त स्टॉक नहीं मिल पा रहा है.
पिछले वर्षों की खपत (टन में)
- 2025-26: रबी – 1,73,200; खरीफ – 2,78,900 (अनुमानित आवश्यकता)
- 2024-25: रबी – 1,69,500; खरीफ – 2,72,800
- 2023-24: रबी – 1,65,981; खरीफ – 2,68,624
वैश्विक संकट का असर
खाड़ी क्षेत्र से आने वाली गैस और फर्टिलाइजर आपूर्ति पर युद्ध का सीधा प्रभाव पड़ रहा है. हालांकि सीजफायर के बाद कुछ सुधार के आसार हैं, लेकिन वर्तमान में किसान और राज्य सरकार दोनों ही भविष्य को लेकर चिंतित हैं.
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक झारखंड को अतिरिक्त कोटा देने या वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है. किसान संगठन भी इस मुद्दे पर केंद्र पर दबाव बनाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि खरीफ सीजन में खेती प्रभावित न हो.


