Monday, April 6, 2026

रांची में निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर डीसी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अभिभावकों की शिकायतों पर गंभीरता से चर्चा की गई.

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रांची: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों द्वारा री-एडमिशन के नाम पर फीस वसूली का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. हर साल की तरह इस बार भी अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर अलग-अलग मदों में मनमानी फीस लेने का आरोप लगाया है. लंबे समय से चली आ रही इस समस्या पर न तो राज्य सरकार और न ही जिला प्रशासन पूरी तरह लगाम लगा सका है. जिसके कारण हर वर्ष नए सत्र में विवाद और हंगामे की स्थिति बन जाती है.

उपायुक्त की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक

सोमवार को उपायुक्त की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. जिसमें निजी स्कूलों की फीस संरचना और अभिभावकों की शिकायतों पर गंभीरता से चर्चा हुई. इस बैठक को खास तौर पर इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इस बार प्रशासन ने ठोस कार्रवाई के संकेत दिए हैं. बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी समेत शुल्क निर्धारण समिति के सदस्य मौजूद रहे. इस दौरान अभिभावकों से प्राप्त शिकायतों पर विस्तार से विचार किया गया.

री-एडमिशन के नाम पर लिए जा रहे हैं अलग-अलग शुल्क

शिकायतों में प्रमुख रूप से यह बात सामने आई कि कई निजी स्कूल री-एडमिशन के नाम पर अलग-अलग शुल्क वसूल रहे हैं. जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. इसके अलावा कुछ स्कूलों द्वारा एक ही दुकान से यूनिफॉर्म और किताबें खरीदने के लिए बाध्य करने की शिकायत भी बैठक में उठाई गई. अभिभावकों का कहना है कि एनसीईआरटी की पुस्तकों को नजरअंदाज कर महंगे प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है. जिससे शिक्षा का खर्च अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है.

अगले सप्ताह निजी स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक

इन सभी मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए समिति ने निर्णय लिया कि अगले सप्ताह जिले के सभी निजी स्कूलों के प्रबंधकों के साथ बैठक की जाएगी. इस दौरान स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे. जिससे कि फीस में पारदर्शिता लाई जा सके. साथ ही निजी स्कूलों पर किसी भी प्रकार की मनमानी पर रोक लगाई जा सके.

RTE के नियमों का उल्लंघन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं: डीसी

उपायुक्त ने बैठक में साफ कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के नियमों का उल्लंघन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. जो स्कूल लगातार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही, एनसीईआरटी की पुस्तकों को प्राथमिकता नहीं देने वाले स्कूलों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं.

प्रशासन का मानना है कि यदि इन निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया गया, तो निजी स्कूलों की मनमानी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है. हालांकि पिछले अनुभवों को देखते हुए यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या इस बार कार्रवाई जमीनी स्तर पर दिखेगी या यह पहल भी केवल बैठकों तक सीमित रह जाएगी.
फिलहाल प्रशासन की बैठक से अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि उन्हें राहत मिलेगी और शिक्षा के नाम पर हो रही अतिरिक्त वसूली पर अंकुश लगाया जा सकेगा. वहीं, निजी स्कूलों के लिए यह एक स्पष्ट चेतावनी है कि नियमों के खिलाफ जाने पर अब कार्रवाई तय है.

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