डायबिटीज को अक्सर “साइलेंट” बीमारी कहा जाता है क्योंकि यह शरीर में धीरे-धीरे बढ़ती है और इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि कई लोगों को पता ही नहीं चलता है. कई लोगों को लगता है कि डायबिटीज तब होती है जब उन्हें बहुत प्यास लगती है या बार-बार पेशाब आता है. ये आम लक्षण जाने-पहचाने हैं, लेकिन इन लक्षणों के अलावा कुछ अजीब या अनएक्सपेक्टेड लक्षण भी होते हैं जो हाई ब्लड शुगर या इंसुलिन रेजिस्टेंस की ओर इशारा कर सकते हैं. इन शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानने से आपको कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के विकसित होने से पहले ही कदम उठाने में मदद मिल सकती है.
यहां 5 ऐसे असामान्य लक्षण दिए गए हैं जो डायबिटीज का संकेत हो सकते हैं, जैसे कि…
- बार-बार खुजली, खासकर जेनिटल्स के आसपास-लगातार खुजली होना, विशेष रूप से जेनिटल्स जैसे सेंसिटिव हिस्सों में, डायबिटीज का एक हैरान करने लक्षण हो सकता है. हाई ब्लड शुगर होने से यीस्ट इन्फेक्शन या फंगल ग्रोथ बढ़ सकता है, क्योंकि चीनी माइक्रोब्स को पनपने के लिए एक अच्छा माहौल देती है.
ऐसे मामलों में, अगर आपको बार-बार इन्फेक्शन होने जैसे लक्षण दिखाई दें (जिन पर इलाज का कोई खास असर न हो) या लगातार लालिमा, जलन या सामान्य बेचैनी महसूस हो, तो सावधान हो जाएं. असल में, ग्लूकोज का लेवल बढ़ने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और फंगल ओवरग्रोथ को बढ़ावा मिलता है. अगर इसका इलाज न किया जाए, तो इससे लंबे समय तक जलन और बार-बार इन्फेक्शन होने की समस्या बनी रह सकती है. - बिना वजह स्किन में बदलाव-डायबिटीज के कारण स्किन में कई तरह के बदलाव आ सकते हैं. इन असामान्य बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है, जिनमें गर्दन, बगल या कोहनी पर काले धब्बे (एकेन्थोसिस नाइग्रिकन्स नामक स्थिति), त्वचा का रूखा, पपड़ीदार या संक्रमण-प्रवण होना, और छोटे दाने या चकत्ते जो आसानी से ठीक नहीं होते, शामिल हैं. ये त्वचा संबंधी समस्याएं हाई ब्लड शुगर के कारण होती हैं, जो ब्लड सर्कुलेशन पर असर डाल सकता है और छोटी ब्लड वेसल को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे त्वचा का स्वास्थ्य और शरीर की ठीक होने की क्षमता प्रभावित होती है.
- वजन में अचानक या बिना किसी वजह के बदलाव-वजन में अचानक बढ़ोतरी या कमी डायबिटीज का एक चेतावनी भरा संकेत हो सकता है. असल में, जब शरीर ग्लूकोज का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो वह एनर्जी के लिए फैट और मसल्स को तोड़ना शुरू कर देता है, जिससे वजन कम होने लगता है. इसके उलट, इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से शरीर में ज्यादा फैट जमा हो सकता है (खास तौर पर पेट के आस-पास) जिससे वजन बढ़ जाता है. भले ही आपके खान-पान या शारीरिक गतिविधियों में कोई बदलाव न हुआ हो, फिर भी वजन में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव ब्लड शुगर को कंट्रोल करने से जुड़ी अंदरूनी समस्याओं का संकेत हो सकते हैं.
- नजर में बदलाव-धुंधली नजर, फोकस करने में मुश्किल, या ‘फ्लोटर्स’ देखना, ये सभी डायबिटीज से जुड़े हो सकते हैं. हाई ब्लड शुगर के कारण आपकी आंखों के लेंस में फ्यूइड शिफ्ट हो जाता है, जिससे कुछ समय के लिए आपकी साफ देखने की क्षमता बदल सकती है. इस तरह के लक्षण दिखने पर रेगुलर आंखों की जांच करवाएं और ब्लड शुगर लेवल पर करीब से नजर रखें.अगर इसे कंट्रोल न किया जाए, तो लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रेटिना को नुकसान पहुंचा सकता है और डायबिटिक रेटिनोपैथी का कारण बन सकता है, यह एक गंभीर स्थिति है जिससे नजर जा सकती है.
- हाथों या पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी-हाथ-पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन महसूस होना (जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं) एक और चेतावनी का संकेत है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हाई ब्लड शुगर समय के साथ नसों को नुकसान पहुंचा सकता है. अगर आपको पैर की उंगलियों, पैरों या उंगलियों में लगातार चुभन महसूस हो और गर्मी, ठंड या दर्द के प्रति कम सेंसिटिविटी महसूस हो तो शुगर जांच जरूरी करें. इस समस्या का जल्दी पता लगाना बहुत जरूरी है, क्योंकि न्यूरोपैथी से इंफेक्शन, घाव का धीरे भरना या चलने-फिरने में कमी जैसी गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं.
डॉक्टर को कब दिखाएं
अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण बार-बार दिखते हैं, तो किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल से सलाह लेना जरूरी है. वे आपको ये सलाह दे सकते हैं…
- ब्लड शुगर टेस्टिंग (फास्टिंग ग्लूकोज, A1C)
- कॉम्प्रिहेंसिव मेटाबोलिक पैनल
- लाइफस्टाइल या डाइट में बदलाव
- अगर जरूरी हो तो दवाएं
- डायबिटीज का जल्दी पता चलने पर इसे कंट्रोल किया जा सकता है या ठीक भी किया जा सकता है. डायबिटीज का तुरंत इलाज करने से दिल की बीमारी, किडनी को नुकसान, आंखों की रोशनी कम होना और नसों को नुकसान जैसी दिक्कतों से बचा जा सकता है.
बचाव के टिप्स
भले ही आपको डायबिटीज का पता न चला हो, लेकिन हेल्दी आदतें अपनाने से आपका रिस्क कम हो सकता है, जैसे कि…
- बैलेंस्ड डाइट लें जिसमें कम एक्स्ट्रा शुगर और रिफाइंड कार्ब्स हों
- रेगुलर एक्सरसाइज करें, ज्यादातर दिन कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करने का टारगेट रखें
- हेल्दी वेट बनाए रखें और कमर के घेरे पर ध्यान दें
- शराब कम पिएं और स्मोकिंग से बचें
- रेगुलर चेक-अप और स्क्रीनिंग करवाएं


