Monday, April 6, 2026

पश्चिम एशिया संकट खिंचने से ऊँची लागत के कारण वैश्विक खाद्य कीमतें बढ़ेंगी, जिससे 2027 तक अनाज आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना है.

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नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने दुनिया को एक गंभीर आर्थिक चेतावनी जारी की है. FAO के अनुसार, यदि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और संघर्ष 40 दिनों की अवधि को पार कर जाता है, तो वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है. यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब मार्च के महीने में लगातार दूसरे महीने वैश्विक खाद्य सूचकांक में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

मार्च में बढ़ी कीमतें
FAO द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक खाद्य मूल्य सूचकांक मार्च में औसतन 128.5 अंक रहा, जो फरवरी की तुलना में 2.4 प्रतिशत अधिक है. यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले भी 1 प्रतिशत ज्यादा है. खाद्य कीमतों में इस वृद्धि का मुख्य कारण पश्चिम एशिया संकट के चलते ऊर्जा की कीमतों (कच्चे तेल) में आई तेजी को माना जा रहा है.

40 दिनों का ‘डेडलाइन’ और खेती पर असर
FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने स्पष्ट किया है कि अभी तक कीमतों में बढ़ोतरी मामूली रही है क्योंकि अनाज का वैश्विक भंडार पर्याप्त है. लेकिन असली खतरा 40 दिनों के बाद शुरू होगा. यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसके दो गहरे प्रभाव होंगे:

  • खेती की लागत: ईंधन और उर्वरक (Fertilizer) महंगे होने से किसानों का मुनाफा कम हो जाएगा.
  • उत्पादन में कटौती: लागत बढ़ने पर किसान या तो कम खाद का उपयोग करेंगे, या कम रकबे में बुवाई करेंगे, या फिर ऐसी फसलों की ओर रुख करेंगे जिनमें कम उर्वरक की जरूरत हो.

टोरेरो के अनुसार, किसानों के ये फैसले न केवल इस साल के अंत तक, बल्कि पूरे 2027 के लिए वैश्विक खाद्य आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित करेंगे.

किन चीजों के दाम बढ़े?
चीनी: मार्च में चीनी की कीमतों में 7.2% की भारी वृद्धि हुई. इसका कारण यह है कि प्रमुख निर्यातक देश ब्राजील अब गन्ने का उपयोग चीनी के बजाय इथेनॉल बनाने में ज्यादा कर रहा है क्योंकि कच्चे तेल के दाम ऊंचे हैं.

वनस्पति तेल: इसमें 5.1% की तेजी आई है, क्योंकि बायोफ्यूल की मांग बढ़ने की उम्मीद है.

गेहूं: अमेरिका में सूखे और ऑस्ट्रेलिया में उर्वरकों की कमी के डर से गेहूं की कीमतें 4.3% तक बढ़ गई हैं.

FAO का अनुमान है कि इस साल वैश्विक गेहूं उत्पादन 820 मिलियन टन रह सकता है, जो पिछले साल से 1.7 प्रतिशत कम है. यदि पश्चिम एशिया का संकट जल्द नहीं सुलझा, तो उर्वरक और परिवहन की बढ़ी हुई लागत दुनिया के गरीब और विकासशील देशों में खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती है.

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