Thursday, April 2, 2026

पेट्रोल-डीजल के बाद अब साबुन, सोडा और खाने का तेल 4% तक महंगा होगा; नुवामा रिपोर्ट के अनुसार नई कीमतें अप्रैल से लागू होंगी.

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भारतीय आम उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव के बाद अब रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली वस्तुओं (FMCG) के दाम भी बढ़ने जा रहे हैं. ‘नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज’ की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एफएमसीजी कंपनियां वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1FY27) से अपने उत्पादों की कीमतों में ताजा बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं.

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी तेजी और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने इनपुट लागत पर भारी दबाव डाल दिया है. कच्चा तेल वर्तमान में 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है, जिससे पेट्रोकेमिकल उत्पादों जैसे पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीइथिलीन की लागत बढ़ गई है. इनका उपयोग साबुन, डिटर्जेंट और अन्य उत्पादों की सख्त पैकेजिंग और कैप्स बनाने में किया जाता है. पैकेजिंग लागत किसी भी FMCG कंपनी के कुल खर्च का लगभग 15% से 20% हिस्सा होती है.

कितनी होगी बढ़ोतरी और कब से होगी लागू?
नुवामा का अनुमान है कि यदि कच्चे माल की कीमतों में मौजूदा उछाल बना रहता है, तो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में कीमतों में कम से कम 3% से 4% की वृद्धि होगी. वर्तमान में कंपनियों के पास 30 से 45 दिनों का स्टॉक मौजूद है, इसलिए वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही पर इसका असर सीमित रहेगा. लेकिन जैसे ही पुराना स्टॉक खत्म होगा, नई दरें लागू कर दी जाएंगी.

इन सेक्टरों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
सबसे ज्यादा मार पेंट, खाने का तेल (Edible Oils), साबुन और डिटर्जेंट सेक्टर पर पड़ने वाली है.

  • पेंट इंडस्ट्री: एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स जैसी कंपनियों ने पहले ही कीमतों में बदलाव शुरू कर दिया है. इनके कच्चे माल का लगभग 40% हिस्सा कच्चे तेल के डेरिवेटिव्स से जुड़ा होता है.
  • साबुन और डिटर्जेंट: पाम ऑयल और पैकेजिंग मैटेरियल महंगा होने से इनके दाम बढ़ना तय है.
  • खाने का तेल: वैश्विक अनिश्चितता के कारण खाद्य तेलों की कीमतों में भी उछाल की संभावना है.

गर्मी के उत्पादों पर मौसम की मार
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मार्च के दौरान उत्तर और पूर्वी भारत में हुई बेमौसम बारिश ने गर्मी के सीजन वाले उत्पादों जैसे टैलकम पाउडर, आइसक्रीम और ठंडे पेय पदार्थों (Beverages) की मांग को प्रभावित किया है. इससे वरुण बेवरेजेस और यूनाइटेड ब्रुअरीज जैसी कंपनियों की चौथी तिमाही की बिक्री पर असर पड़ सकता है.

वैश्विक संकट का प्रभाव
मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष ने डाबर और इमामी जैसी कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि उनकी कुल बिक्री का लगभग 6% हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है. साथ ही, बढ़ते बीमा और शिपिंग खर्च पूरे कंज्यूमर सेक्टर पर अतिरिक्त दबाव डाल रहे हैं.

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