Wednesday, April 1, 2026

1 अप्रैल 2026 को चैत्र पूर्णिमा का तिथि का आरंम्भ हो रहा है जो कि 2 तारीख हो समाप्त होता है.

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1 अप्रैल 2026 को चैत्र पूर्णिमा का तिथि का आरंम्भ हो रहा है जो कि 2 तारीख हो समाप्त होता है. आज मंगवार के दिन चैत्र पूणिमा का व्रत रखा जाएगा और संध्या के समय चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा. आइए जानते है अर्घ्य देते समय किन बातों का ध्यान रखना आवश्यकत है.

चैत्र पूर्णिमा हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा है. इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्रदेव और हनुमान जी की पूजा की जाती है. इस दिन पूजा, मंत्रोचारण, दान-पुण्य और नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व है. शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है. मान्यता है कि इस रात चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

चैत्र पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2026 में पूर्णिमा तिथि दो दिन, 1 अप्रैल और 2 अप्रैल को पड़ रही है.

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल 2026, सुबह 07:06 बजे.
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2026, सुबह 07:41 बजे.
  • व्रत और अर्घ्य: 1 अप्रैल को पूर्णिमा व्रत और चंद्र पूजन किया जाएगा, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार जिस दिन शाम और रात के समय पूर्णिमा तिथि होती है, उसी दिन चंद्रमा की पूजा और उपवास करना श्रेष्ठ माना जाता है.
  • स्नान-दान और हनुमान जयंती: उदयातिथि के अनुसार 2 अप्रैल को स्नान-दान और हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाएगा.

चंद्र अर्घ्य और पूजा विधि

इस दिन शाम को चंद्रोदय के समय एक चांदी या तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें कच्चा दूध, अक्षत (चावल), सफेद फूल और थोड़ी चीनी मिलाकर एक घोल तैयार करें. चंद्रमा को देखते हुए मंत्रों का जाप करते हुए पात्र से जल नीचे गिराते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दें. अर्घ्य देते समय “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें. इसके बाद हाथ जोड़कर नम करें और सुख-समृद्धि की कामना करें.

चंद्रदेव के मंत्र

  1. ॐ केतवे नमः
  2. ॐ स्थूलशिरसे नमः
  3. ॐ शिरोमात्राय नमः
  4. ॐ ध्वजाकृतये नमः
  5. ॐ नवग्रहयुताय नमः
  6. ॐ सिंहिकासुरीगर्भसंभवाय नमः
  7. 7.ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नमः
  8. 8. ॐ क्लीं सोम मंत्राय नमः
  9. 9. ॐ नमः शशांकशेखराय
  10. 10. ॐ शम् शम शमाय नमः

चैत्र पूर्णिमा के नियम और सावधानियां

  • तामसिक भोजन: आज के दिन पूरी तरह सात्विक रहें. लहसुन, प्याज या मांस-मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें.
  • क्रोध न करें: पूर्णिमा का प्रभाव मन पर गहरा होता है, इसलिए शांत रहें और विवादों से बचें.
  • दान: अर्घ्य के बाद सफेद वस्तुओं जैसे चावल, चीनी, सफेद वस्त्र या दूध का दान करना पुण्यकारी माना जाता है.
  • सत्यनारायण कथा: आज के दिन भगवान विष्णु की सत्यनारायण कथा सुनना या पढ़ना उत्तम फलदायी होता है.

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