Monday, March 30, 2026

वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) का समापन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद निराशाजनक रहा.

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वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) का समापन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद निराशाजनक रहा. सोमवार, 30 मार्च को शेयर बाजार के आखिरी कारोबारी सत्र में भारी बिकवाली देखने को मिली. मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के विस्तार की आशंकाओं ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.

बाजार का हाल: आंकड़ों की नजर में
कारोबार के अंत में, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,635.67 अंक (2.22%) गिरकर 71,947.55 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 488.20 अंक (2.14%) टूटकर 22,331.40 पर आ गया. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी का 22,500 के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर से नीचे बंद होना तकनीकी रूप से काफी कमजोर संकेत है, जो आने वाले समय में गिरावट जारी रहने की ओर इशारा करता है.

गिरावट के मुख्य कारण
बाजार में इस “रक्तपात” के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता संघर्ष है. खबरों के मुताबिक, ईरानी हमलों के विस्तार और हूतियों के युद्ध में शामिल होने की रिपोर्टों ने निवेशकों को जोखिम कम करने (Risk-off) पर मजबूर कर दिया. इसके अलावा, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका प्रबल हो गई है, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए मुद्रास्फीति (Inflation) का बड़ा खतरा है

सेक्टरवार प्रदर्शन और टॉप लूजर्स
बिकवाली का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर पड़ा. निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहे.

निफ्टी के टॉप लूजर्स: बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस और भारतीय स्टेट बैंक (SBI).

सेंसेक्स के दिग्गज: सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही हरे निशान में बंद हो पाए. बाकी सभी दिग्गज जैसे इंडिगो, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक भारी नुकसान में रहे.

ब्रॉडर मार्केट की हालत और भी खराब रही, जहाँ निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.6% से ज्यादा की गिरावट देखी गई.

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि 22,500–22,600 का स्तर अब निफ्टी के लिए तत्काल प्रतिरोध का काम करेगा. जब तक भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक नए वित्त वर्ष (FY27) की शुरुआत में भी उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है.

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