केंद्र सरकार द्वारा जारी नवीनतम वार्षिक ‘पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे’ (PLFS) 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय श्रम बाजार में सुधार के सकारात्मक संकेत मिले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर (UR) जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई है, जो एक वर्ष पहले 3.2 प्रतिशत थी.
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी इस सर्वेक्षण में बताया गया है कि बेरोजगारी दर में यह मामूली लेकिन स्थिर गिरावट विभिन्न क्षेत्रों और लिंगों में निरंतर प्रगति को दर्शाती है.
लैंगिक और क्षेत्रीय विश्लेषण
सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, पुरुषों की बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है, जो 2024 के 3.3% से घटकर 2025 में 3.1% पर आ गई है. वहीं, महिलाओं के लिए बेरोजगारी दर 3.1% पर स्थिर बनी हुई है.
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच श्रम अवशोषण की क्षमता में भी अंतर देखा गया. ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 2.4% दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष के 2.5% से कम है. विशेष रूप से, ग्रामीण भारत में महिलाओं की बेरोजगारी दर केवल 2.1% रही, जो इसी क्षेत्र के पुरुषों (2.6%) की तुलना में बेहतर स्थिति दर्शाती है. शहरी क्षेत्रों में, पुरुषों के लिए यह दर 4.2% और महिलाओं के लिए 6.4% रही.
रोजगार की प्रकृति में बदलाव: स्वरोजगार से वेतनभोगी नौकरियों की ओर
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू रोजगार की गुणवत्ता में आया सुधार है. आंकड़ों से पता चलता है कि देश में स्वरोजगार की हिस्सेदारी 57.5% से घटकर 56.2% रह गई है. इसके विपरीत, ‘नियमित वेतनभोगी नौकरियों’ में वृद्धि देखी गई है, जो 22.4% से बढ़कर 23.6% हो गई है. यह वृद्धि पुरुषों (25.4% से 26.5%) और महिलाओं (16.6% से 18.2%) दोनों के लिए समान रूप से दर्ज की गई, जो अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण का संकेत है.
क्षेत्रीय बदलाव और आय में वृद्धि
औद्योगिक भागीदारी के मामले में, कृषि क्षेत्र अभी भी सबसे बड़ा नियोक्ता बना हुआ है, हालांकि इसकी हिस्सेदारी 44.8% से घटकर 43.0% रह गई है. निर्माण क्षेत्र में भी 12.3% से गिरकर 12% की मामूली गिरावट आई है. दूसरी ओर, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार हुआ है, जो 11.6% से बढ़कर 12.1% हो गया है, और सेवा क्षेत्र भी 12.2% से बढ़कर 13.1% पर पहुँच गया है.
श्रमिकों की औसत आय में भी सम्मानजनक वृद्धि देखी गई है. नियमित वेतन पाने वाले पुरुषों की औसत मासिक आय 5.8% की वृद्धि के साथ ₹24,217 हो गई है, जबकि महिलाओं की आय में 7.2% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब ₹18,353 है. स्वरोजगार श्रेणी में भी पुरुषों की आय में 6% और महिलाओं की आय में 8.8% का इजाफा हुआ है.
सर्वेक्षण का पैमाना
यह व्यापक सर्वेक्षण देश भर के 2,70,472 घरों (1,48,718 ग्रामीण और 1,21,754 शहरी) में किया गया था, जिसमें कुल 11,48,634 व्यक्तियों के डेटा का विश्लेषण किया गया. रिपोर्ट यह निष्कर्ष निकालती है कि श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) ग्रामीण क्षेत्रों में 80.5% (पुरुष) और 45.9% (महिला) के साथ मजबूत बनी हुई है, जो भारत की आर्थिक विकास यात्रा में श्रम शक्ति की सक्रिय भूमिका की पुष्टि करती है.


