मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की भारी बिकवाली के चलते शेयर बाजार लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ. शुक्रवार को आखिरी कारोबारी सत्र में बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए.
बाजार का हाल: सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
सप्ताह के अंतिम दिन निफ्टी 2.09 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 22,819 के स्तर पर बंद हुआ. पूरे सप्ताह के दौरान निफ्टी में कुल 1.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स शुक्रवार को 1,690 अंक यानी 2.25 प्रतिशत टूटकर 73,583 के स्तर पर आ गया. साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स में 1.27 प्रतिशत की कमी आई है.
गिरावट के मुख्य कारण
ईरान-अमेरिका संघर्ष
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है. बाजार पूरी तरह से वैश्विक घटनाओं से संचालित हो रहा है.
कच्चे तेल की कीमतें
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $98 से $115 प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने और व्यापार घाटा गहराने की आशंका है.
विदेशी निवेशकों की निकासी
मार्च 2026 के महीने में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से ₹1.13 लाख करोड़ से अधिक की निकासी की है. यह चालू वित्त वर्ष की सबसे बड़ी मासिक बिकवाली है.
रुपये में कमजोरी
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है और 94 का स्तर पार कर चुका है.
सेक्टरवार प्रदर्शन
इस गिरावट के दौर में बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा. ‘बैंक निफ्टी’ शुक्रवार को 2.67 प्रतिशत गिरकर 52,274 पर बंद हुआ. इसके अलावा पीएसयू बैंक और मेटल सेक्टर में भी भारी बिकवाली देखी गई. हालांकि, आईटी (IT) और फार्मा सेक्टर ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की. आईटी इंडेक्स में साप्ताहिक आधार पर 1.17 प्रतिशत और फार्मा में 0.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा. निफ्टी के लिए 22,750–22,850 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन बना हुआ है, जबकि 23,000–23,100 के स्तर पर इसे कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है.


