नई दिल्ली: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए होटलों और रेस्तरां द्वारा बिल में लगाए जाने वाले अतिरिक्त ‘गैस और ईंधन अधिभार’ को पूरी तरह से ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ घोषित कर दिया है. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि खाने के बिल में ‘एलपीजी शुल्क’, ‘गैस सरचार्ज’ या ‘फ्यूल कॉस्ट रिकवरी’ जैसे नामों से वसूला जाने वाला पैसा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
हाल ही में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) पर ऐसी शिकायतों की बाढ़ आ गई थी कि कई बड़े होटल और रेस्तरां ग्राहकों को बताए बिना उनके बिल में 5% से 10% तक ‘गैस सरचार्ज’ जोड़ रहे हैं. CCPA की जांच में यह पाया गया कि यह 2022 के ‘सर्विस चार्ज’ प्रतिबंध से बचने का एक नया तरीका है. संस्थान सर्विस चार्ज का नाम बदलकर उसे ईंधन के खर्च के नाम पर वसूल रहे थे.
CCPA के प्रमुख निर्देश
प्राधिकरण ने साफ कहा है कि होटल चलाने का खर्च (जैसे बिजली, गैस और कर्मचारी) मेन्यू में दी गई कीमतों का हिस्सा होना चाहिए. इसे अलग से बिल में नहीं जोड़ा जा सकता. कोई भी स्थापना ग्राहक की सहमति के बिना बिल में कोई भी अतिरिक्त शुल्क ‘डिफ़ॉल्ट’ रूप से नहीं लगा सकती. उपभोक्ता को केवल वही भुगतान करना होगा जो मेन्यू कार्ड पर लिखा है और उस पर लगने वाला सरकारी टैक्स (GST).
उपभोक्ताओं के लिए क्या हैं अधिकार?
यदि आपके बिल में ऐसा कोई शुल्क जोड़ा गया है, तो आप सीधे रेस्तरां प्रबंधन से इस अवैध चार्ज को बिल से हटाने के लिए कह सकते हैं, यदि वे मना करते हैं, तो आप तुरंत नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल कर सकते हैं. आप घर बैठे e-Jagriti पोर्टल के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
CCPA ने चेतावनी दी है कि जो संस्थान इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्राधिकरण अब देशभर के होटलों की निगरानी कर रहा है ताकि ग्राहकों को इस ‘हिडन चार्ज’ की लूट से बचाया जा सके.


