रांचीः राजधानी रांची में शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए रांची नगर निगम ने राजस्व बढ़ाने की दिशा में सख्त रुख अपना लिया है. इस वित्तीय वर्ष में निगम ने 100 करोड़ रुपये के टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे पूरा करने के लिए अब प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है. अब तक करीब 94 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि शेष लक्ष्य को हासिल करने के लिए टीम को तय समय सीमा में अतिरिक्त प्रयास करने का निर्देश दिया गया है.
निगम की ओर से सबसे बड़ा फोकस अब उन लोगों पर है, जो होल्डिंग टैक्स में गड़बड़ी कर राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं. खासकर सेल्फ एसेस्मेंट के दौरान कई भवन मालिकों द्वारा अपनी संपत्ति का क्षेत्रफल कम दिखाकर टैक्स चोरी करने के मामले सामने आए हैं. हाल के महीनों में कराई गई नापी और फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान यह गड़बड़ी उजागर हुई है, जिसमें कई बड़े भवनों का वास्तविक क्षेत्रफल कागजों में दर्ज क्षेत्रफल से काफी अधिक पाया गया.
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की अनियमितताओं को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सभी संदिग्ध मामलों की सूची तैयार कर बकाया टैक्स वसूलने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. इसके साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि टैक्स चोरी करने वालों से 100 प्रतिशत पेनाल्टी के साथ वसूली की जाएगी. निगम ने यह भी कहा है कि जिन लोगों ने गलत जानकारी दी है या बाद में भवन का विस्तार किया है, वे स्वयं सही विवरण देकर टैक्स जमा कर दें, ताकि आगे की सख्त कार्रवाई से बचा जा सके.
बड़े बकाएदारों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की भी तैयारी है। इसके तहत ऐसे लोगों की पहचान कर उनसे जल्द से जल्द टैक्स वसूली की जाएगी. जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा गया है. निगम का मानना है कि इस अभियान से न केवल टैक्स चोरी पर रोक लगेगी, बल्कि शहर के विकास कार्यों के लिए जरूरी संसाधन भी उपलब्ध हो सकेंगे.
जांच के दौरान सामने आए कुछ मामलों ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है. हिनू स्थित सृष्टि हॉस्पिटल ने जहां 14,100 वर्गफीट क्षेत्रफल घोषित किया था, वहीं वास्तविक नापी में यह 24,870 वर्गफीट पाया गया. इसी तरह अरगोड़ा चौक स्थित संतति आईवीएफ एवं लिटिल हार्ट हॉस्पिटल ने 19,700 वर्गफीट क्षेत्रफल बताया था, जबकि जांच में यह 32,127 वर्गफीट निकला. ऐसे मामलों ने स्पष्ट कर दिया है कि बड़े स्तर पर टैक्स चोरी की जा रही थी.
निगम के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अब टैक्स प्रणाली को पारदर्शी बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी. नगर आयुक्त सुशांत गौरव का कहना है कि समय पर सही टैक्स जमा करना ही शहर के विकास में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करता है. सख्ती और लगातार अभियान के जरिए निगम को उम्मीद है कि 100 करोड़ रुपये का लक्ष्य समय पर हासिल कर लिया जाएगा.


