नई दिल्ली: भारत में खरीफ की फसलों की बुवाई शुरू होने वाली है, लेकिन इससे ठीक पहले देश की खेती और किसानों के लिए एक चिंताजनक खबर आई है. केयरएज रेटिंग्स की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण भारत में खाद की सप्लाई रुकने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है.
क्यों बढ़ी है भारत की चिंता?
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल खाद आयात का लगभग 26.2% हिस्सा अकेले पश्चिम एशिया के देशों से आता है. इसके अलावा जॉर्डन से 19.2% और रूस से 15.5% खाद मंगवाई जाती है.
तनाव के कारण समुद्र के जिस रास्ते (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) से यह खाद और कच्चा तेल भारत आता है, वहां जहाजों की आवाजाही खतरनाक हो गई है. अगर यह रास्ता बंद होता है या सप्लाई में देरी होती है, तो आने वाले बुवाई सीजन में भारतीय किसानों को खाद की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है.
खेती और अर्थव्यवस्था पर असर
खाद की कमी और बढ़ती कीमतें
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि सप्लाई चेन टूटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद और इसे बनाने वाली गैस (LNG) के दाम बढ़ सकते हैं. इसका सीधा असर भारत में खाद की कीमतों पर पड़ेगा.
सरकार पर सब्सिडी का बोझ
भारत सरकार किसानों को सस्ती खाद देने के लिए कंपनियों को बड़ी मात्रा में सब्सिडी देती है. अगर खाद महंगी हुई, तो सरकार का सब्सिडी बिल, जो पहले से ही 1.71 लाख करोड़ रुपये के करीब है, और ज्यादा बढ़ जाएगा.
मानसून और पैदावार का खतरा
इस साल वैसे ही ‘एल नीनो’ (El Nino) के कारण मानसून कमजोर रहने की आशंका है. ऐसे में अगर समय पर खाद नहीं मिली, तो फसलों की पैदावार कम हो सकती है, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम (महंगाई) बढ़ सकते हैं.
ऊर्जा सुरक्षा पर भी संकट
भारत अपनी जरूरत का 40% कच्चा तेल भी इसी रास्ते से मंगवाता है. खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को चलाने के लिए जरूरी 80% से ज्यादा गैस भी यहीं से आती है. यानी अगर वहां हालात बिगड़ते हैं, तो न केवल खाद बल्कि पेट्रोल-डीजल की सप्लाई और देश में खाद का उत्पादन भी प्रभावित होगा.
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का संकट भारत की थाली और किसान की जेब, दोनों पर भारी पड़ सकता है. सरकार अब अन्य देशों जैसे रूस और मोरक्को से खाद की सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रही है ताकि आने वाले सीजन में कोई बड़ी दिक्कत न हो.


