विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के अनुसार, क्रोहन रोग (CD) और अल्सरेटिव कोलाइटिस (UC) पाचन तंत्र को प्रभावित करने वाले गंभीर, क्रोनिक सूजन वाली आंतों के रोग (IBD) हैं. इन स्थितियों के कारण पाचन तंत्र में सूजन, गंभीर दस्त, मल में खून आना, पेट दर्द, थकान और वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, ये ऐसे लक्षण हैं जो किसी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता पर गहरा असर डालते हैं. माना जाता है कि इन बीमारियों की जड़ में जेनेटिक फैक्टर्स, इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी और एनवायरनमेंटल फैक्टर्स (जैसे वेस्टर्न डाइट) का एक कॉम्प्लेक्स मेल होता है. इसलिए, इन स्थितियों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
हालांकि, बहुत से लोग IBD को बवासीर (Hemorrhoids) समझ लेते हैं. इस गलतफहमी के कारण यह धारणा बन जाती है कि इस स्थिति का इलाज घरेलू उपायों या साधारण नुस्खों से किया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि IBD का निदान शुरुआती चरण में न हो, तो यह आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए, इन दोनों स्थितियों के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है. सीनियर सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव होन्नवारा श्रीनिवासन इन दोनों के बीच के अंतर और लक्षणों के बारे में विस्तार से बताते हैं…

- एएमआरआई कोलकाता में गैस्ट्रो साइंसेज के सलाहकार डॉ. शाश्वत चटर्जी बताते हैं कि मलाशय से खून आना, पेट दर्द, ऐंठन और बार-बार दस्त लगना जैसे लक्षणों को अक्सर बवासीर (जो कि एक आम समस्या है) समझ लिया जाता है. हालांकि, ये लक्षण किसी गंभीर अंदरूनी समस्या, जैसे कि इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) की ओर भी इशारा कर सकते हैं. IBD कोई आम संक्रमण नहीं है, बल्कि, यह पाचन तंत्र में होने वाली एक क्रोनिक सूजन है. यदि इसका पता शुरुआती फेज में न चले, तो यह आंतों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इसी कारण से, बवासीर और IBD के बीच के अंतर को समझना बेहद जरूरी है. गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने इन अंतरों के बारे में विस्तार जानकारी दी है. जो इस प्रकार है.

- डॉ. शाश्वत चटर्जी के अनुसार, बहुत से लोग पेट दर्द और गुदा से खून आने जैसे लक्षणों को बवासीर समझ लेते हैं. हालांकि, ये लक्षण किसी ज्यादा गंभीर बीमारी, जैसे कि इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) का संकेत भी हो सकते हैं. इन दोनों बीमारियों के बीच के अंतर को समझना, साथ ही इनके लक्षणों और बचाव के उपायों को जानना बहुत जरूरी है. IBD के लक्षणों में पेट दर्द, ऐंठन, दस्त या कब्ज, मल में खून या बलगम आना, वजन कम होना, सुस्ती, भूख न लगना और पेट में लगातार गैस बनना शामिल हैं. यह प्रतिरक्षा प्रणाली से संबंधित एक गंभीर बीमारी है. हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से आंतों पर हमला कर देती है, जिससे आंतों में अल्सर और सूजन हो जाती है.
- इसमें दो प्रकार शामिल हैं: क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस. IBD जेनेटिक डिफेक्ट, दूषित भोजन, एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग और स्मोकिंग जैसी आदतों के कारण होता है. इस स्थिति से जुड़े लक्षणों में खूनी दस्त, पेट में तेज दर्द, बिना किसी कारण के वजन कम होना, सुस्ती और बुखार शामिल हैं. IBD से पीड़ित लोगों को जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते, आंखों की समस्याएं और लिवर से जुड़ी कॉम्प्लिकेशन का भी अधिक खतरा होता है.
- इसके अलावा, बवासीर एक ब्लड वेसल्स से जुड़ी समस्या है. यह समस्या तब होती है जब गुदा के पास की ब्लड वेसल्स सूज जाती हैं और नीचे की ओर खिसक जाती हैं. इस समस्या के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें लंबे समय तक कब्ज रहना, मल त्याग करते समय जोर लगाना, कम फाइबर वाला खाना खाना और लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहना शामिल है. इसके अलावा, बवासीर से जुड़े लक्षणों में आमतौर पर मल त्याग के बाद खून के धब्बे दिखना (जो आमतौर पर दर्द रहित होते हैं), चमकीला लाल खून आना, और गुदा में खुजली या सूजन महसूस होना शामिल है. हालांकि, एक जरूरी बात यह है कि बवासीर की वजह से शरीर में वजन कम होना या बुखार आना जैसी दूसरी शारीरिक समस्याएं नहीं होती हैं.
बवासीर के लिए बरती जाने वाली सावधानियां

- हाई फाइबर वाले आहार: प्रतिदिन कम से कम 25 से 30 ग्राम फाइबर का सेवन करना चाहिए. विशेष रूप से ताजे फल, सब्जियां और पत्तेदार सब्जियां आहार का हिस्सा होनी चाहिए.
- पानी: पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है. आपको प्रतिदिन कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए.
- शौच का समय: शौच के लिए शौचालय में दो मिनट से अधिक समय न बिताएं. खासकर शौचालय में आपको फोन का उपयोग बंद कर देना चाहिए.
आंत्रशोथ रोग (छोटी आंत की सूजन)(IBD) के लिए बरती जाने वाली सावधानियां
- आहार: ताजी सब्जियों, फलों, मेवों और जैतून के तेल से भरपूर Mediterranean Diet का पालन करें. प्रोसेस्ड फूड्स और चीनी युक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करें.
- आदतें: स्मोकिंग तुरंत बंद कर देना चाहिए
- दवाइयां: डॉक्टर की सलाह के बिना दर्द निवारक दवाओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए.
- तनाव: योग या ध्यान के माध्यम से मानसिक तनाव को कम करें.
आपको कब समझ आना चाहिए कि यह बवासीर नहीं है?
एएमआरआई कोलकाता में गैस्ट्रो साइंसेज के सलाहकार डॉ. शाश्वत चटर्जी के अनुसार, यदि आपको कुछ लक्षण महसूस होते हैं, तो यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह केवल बवासीर नहीं है. जैसे कि…
- एनीमिया: खून की कमी के कारण शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल कम हो जाता है और त्वचा पीली पड़ जाती है.
- भूख न लगना: खाने की इच्छा में कमी आना
- लगातार बुखार: शाम के समय हल्का बुखार.
- पेट फूलना: पेट हमेशा कसा हुआ और भारी महसूस होता है.


