गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है, और इसके साथ ही सूरज की गर्मी की तीव्रता भी काफी बढ़ गई है. ऐसे में, लोगों को अपनी त्वचा को इस तेज धूप से बचाना चाहिए. दरअसल, गर्मियों की शुरुआत के साथ ही, तेज धूप और बढ़ता तापमान हमारी त्वचा पर सीधा और बुरा असर डालते हैं. इसलिए, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मियों के पूरे मौसम में त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए.
बहुत से लोग मानते हैं कि सनस्क्रीन का इस्तेमाल सिर्फ अपनी सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन असल में, यह त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. सूरज की रोशनी में अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणें होती हैं, जिनका हमारी त्वचा पर सीधा और नुकसानदायक असर पड़ता है. इससे सनबर्न या स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए, त्वचा विशेषज्ञ बताते हैं कि सनस्क्रीन एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जो इन किरणों से होने वाले नुकसान से त्वचा को बचाता है. आइए डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ आशा सकलानी से जानते हैं कि गर्मियों के मौसम में सनस्क्रीन क्यों जरूरी है और हमें किस तरह का सनस्क्रीन इस्तेमाल करना चाहिए.

गर्मियों में सनस्क्रीन लगाने के फायदे
- डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ आशा सकलानी बताती हैं कि गर्मियों के मौसम में सूरज की रोशनी बहुत तेज होती है, इसलिए, त्वचा की देखभाल करना बेहद जरूरी होता है. सूरज की रोशनी में अदृश्य UV किरणें होती हैं. सनस्क्रीन इन किरणों से त्वचा की सुरक्षा करने के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है. सनस्क्रीन के कई फायदे हैं, जैसे कि सनबर्न से बचाव, झुर्रियों की रोकथाम और टैनिंग पर कंट्रोल करना.
- धूप से होने वाले जलन से बचाव: सनस्क्रीन धूप के कारण होने वाली त्वचा की लालिमा, सूजन और छिलने जैसी समस्याओं को कम करने में प्रभावी है.
- झुर्रियों से बचाव: सूरज की अत्यधिक रोशनी से त्वचा पर झुर्रियां जल्दी पड़ सकती हैं. हालांकि, सनस्क्रीन का इस्तेमाल करके इस समस्या को रोका जा सकता है.
- त्वचा कैंसर से बचाव: लंबे समय तक धूप में रहने या धूप से त्वचा को नुकसान पहुंचने से त्वचा कैंसर हो सकता है. इस जोखिम से बचने का सबसे अच्छा तरीका सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना है.
- टैनिंग कंट्रोल: सनस्क्रीन त्वचा को काला होने और दाग-धब्बे बनने से रोकने में मदद करता है और त्वचा का रंग एक समान बनाए रखता है.
सही सनस्क्रीन का चुनाव कैसे करें?

हालांकि, सभी सनस्क्रीन एक जैसी नहीं होती हैं, इसलिए डॉक्टर खरीदने के समय दो बातों का ध्यान रखने की सलाह देते हैं. जैसे कि
- ब्रॉड स्पेक्ट्रम: ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF उन सनस्क्रीन्स को कहते हैं जो UVA और UVB, दोनों तरह की किरणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं.
- SPF 30 या उससे ज्यादा: कम से कम 30 SPF वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल करने से लगभग 97 फीसदी किरणें रोकी जा सकती हैं
त्वचा के टाईप के अनुसार सनस्क्रीन चुनें
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ आशा सकलानी बताती हैं कि सनस्क्रीन लगाते समय चेहरे पर चिपचिपापन या ज्यादा सफेदी से बचने के लिए, आपको ऐसा प्रोडक्ट खरीदना चाहिए जो आपकी खास स्किन टाइप के हिसाब से सही हो.
- ऑयली स्किन: इस तरह की स्किन वाले लोगों को जेल-बेस्ड सनस्क्रीन या मैट फिनिश वाले सनस्क्रीन चुनने चाहिए. ये प्रोडक्ट स्किन पर ऑयलीपन नहीं बढ़ाते हैं.
- ड्राई स्किन: रूखी त्वचा से पीड़ित लोगों को क्रीम-आधारित या मॉइस्चराइजर-आधारित सनस्क्रीन का उपयोग करना चाहिए. इससे त्वचा मुलायम बनी रहती है.
- सेंसिटिव स्किन: इस प्रकार की त्वचा वाले लोगों के लिए कम रसायनों वाले ‘मिनरल सनस्क्रीन’ का उपयोग करना सबसे अच्छा होता है, जैसे कि जिंक ऑक्साइड या टाइटेनियम डाइऑक्साइड युक्त सनस्क्रीन.
इसका उपयोग कैसे करें?

- समय: बाहर निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाएं. इस समय तक यह त्वचा में समाकर सुरक्षा प्रदान कर सकता है.
- उपयोग विधि: शरीर के उन सभी हिस्सों पर लगाएं जो धूप के संपर्क में आते हैं, न केवल चेहरे पर, बल्कि गर्दन, हाथों और पैरों पर भी.
- बार-बार लगाना: एक बार लगाने के बाद, यह पूरे दिन असरदार नहीं रहेगा. इसलिए, आपको इसे हर 2 से 3 घंटे में दोबारा लगाना चाहिए. अगर आपको बहुत ज्यादा पसीना आ रहा है या आप स्विमिंग कर रहे हैं, तो आपको इसे और भी ज्यादा बार लगाना चाहिए.


