नई दिल्ली: वॉशिंगटन एग्जामिनर की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया की एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है. रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है कि भारत 2047 तक, यानी अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष तक, एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र बन सकता है.
आर्थिक विकास की रफ्तार
पिछले दो दशकों में भारत ने औसतन 7% से अधिक की वार्षिक विकास दर दर्ज की है. यदि यही गति अगले 20 वर्षों तक बनी रहती है, तो भारत ‘मिडिल-इनकम ट्रैप’ (मध्यम आय जाल) से बचने में सफल हो जाएगा. इस जाल में ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की जैसी अर्थव्यवस्थाएं फंस चुकी हैं. अनुमान है कि तब तक भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 15,000 डॉलर (2025 के मानकों के अनुसार) को पार कर जाएगी.
युवा शक्ति और जनसांख्यिकीय लाभ
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है. लगभग 28 वर्ष की औसत आयु के साथ, भारत अमेरिका और चीन की तुलना में काफी युवा है. आने वाले दशकों में वर्कफोर्स (कार्यबल) में शामिल होने वाले करोड़ों युवा न केवल उत्पादकता बढ़ाएंगे, बल्कि घरेलू खपत को भी गति देंगे. इससे भारत की निर्यात पर निर्भरता कम होगी और एक मजबूत आंतरिक बाजार तैयार होगा.
इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल क्रांति
सरकार का ध्यान बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर है. हाईवे, एयरपोर्ट, पोर्ट और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के विस्तार से सप्लाई चेन मजबूत हो रही है. साथ ही, भारत का डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर—जैसे आधार, मोबाइल पेमेंट (UPI) और ऑनलाइन सार्वजनिक सेवाएं—करोड़ों लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ चुका है. इसने न केवल दक्षता बढ़ाई है, बल्कि छोटे व्यवसायों के लिए धन जुटाना भी आसान बना दिया है.
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और स्टार्टअप
चीन से हटकर पश्चिमी कंपनियों का रुख अब भारत की ओर हो रहा है. एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियां भारत में अपना विस्तार कर रही हैं, जिससे देश में नई तकनीक और पूंजी आ रही है. इसके अलावा, भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम फिनटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में नवाचार कर रहा है.
चुनौतियां और सुधार
हालांकि, भ्रष्टाचार, नौकरशाही की सुस्ती और राजनीतिक विभाजन जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में टैक्स, न्यायिक प्रणाली और शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे सुधार इन बाधाओं को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. निवेशकों का भरोसा भारतीय शेयर बाजार में भी दिख रहा है, जिसने पिछले 20 वर्षों में 15% का औसत रिटर्न दिया है.


