बहुत से लोगों को रात में सोते समय अपने पैरों, जोड़ों और टांगों में दर्द महसूस होता है. यह एक आम समस्या है, जिसके मुख्य कारणों में मांसपेशियों की थकान, शरीर में पानी की कमी या डिहाइड्रेशन, ब्लड सर्कुलेशन में कमी, नसों पर दबाव या पोषक तत्वों की कमी शामिल हो सकती है. हालांकि, यदि यह दर्द असहनीय हो और रोजाना होता हो, तो विशेषज्ञ इसे किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत मानते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, सोते समय पैरों में होने वाला दर्द खून में यूरिक एसिड के सामान्य से अधिक स्तर के कारण हो सकता है. इस खबर में जानें कि हाई यूरिक एसिड क्या है और इससे राहत कैसे पाई जा सकती है…
यूरिक एसिड क्या है?
यूरिक एसिड शरीर का एक अपशिष्ट पदार्थ है. यह तब बनता है जब शरीर ‘प्यूरीन’ नाम के केमिकल को तोड़ता है, ये केमिकल हमारे भोजन में पाए जाते हैं. आमतौर पर, विशेषज्ञ बताते हैं कि यूरिक एसिड ब्लड फ्लो में घुल जाता है और किडनी द्वारा फिल्टर किया जाता है, जिसके बाद यह पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि जब इसका लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है या जब किडनी इसे प्रभावी ढंग से बाहर निकालने में असमर्थ होते हैं, तब यूरिक एसिड शरीर के भीतर जमा होना शुरू हो जाता है. और बाद में, यह जोड़ों और ऊतकों के आसपास सुई जैसे क्रिस्टल बना लेता है, जिससे सूजन, दर्द और गठिया जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के एक अध्ययन के अनुसार, अगर आपकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही हैं, तो समझ लें कि खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ गया है. इस स्थिति को ‘हाइपरयूरिसीमिया’ कहा जाता है. यूरिक एसिड शरीर में कहीं भी जमा हो सकता है. लेकिन, विशेषज्ञ बताते हैं कि यह मुख्य रूप से जोड़ों और किडनी के आसपास जमा होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ लेवल हार्ट डिजीज, डायबिटीज और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है.
खून में यूरिक एसिड का लेवल हाई होने पर क्या लक्षण दिखते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों के खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा हुआ होता है (हाइपरयूरिसीमिया), उनमें से केवल लगभग एक-तिहाई 33 फीसदी लोगों में ही गाउट या किडनी स्टोन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. ज्यादातर मामलों में, यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ लेवल बिना किसी स्पष्ट शारीरिक लक्षण के बना रहता है, इस स्थिति को ‘एसिम्प्टोमैटिक हाइपरयूरिसीमिया’ के नाम से जाना जाता है.

- हाइपरयूरिसीमिया से पीड़ित लोगों को अपने जोड़ों, पैरों और टांगों में सूजन और असहनीय दर्द का अनुभव होता है.
- इसके अलावा, रात में लेटे हुए पैरों में दर्द होना एक आम बात है. 2016 में Rheumatology International जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों के खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा हुआ होता है, उन्हें रात में लेटने पर पैरों में ज्यादा दर्द होता है.
- कुछ लोगों को अपने पैरों के तलवों में जलन का भी अनुभव होता है. इसके अलावा, पैर के बड़े अंगूठे में भी दर्द हो सकता है.
- बताया जाता है कि यह दर्द 12 से 14 घंटे तक बना रह सकता है.
- बार-बार पेशाब करने की इच्छा होती है, और साथ ही पेशाब करने में भी दिक्कत होती है.
- विशेषज्ञों का कहना है कि यूरिक एसिड का हाई लेवल किडनी के भीतर क्रिस्टल का रूप ले सकता है, जिससे पथरी बन जाती है. इस पथरी के कारण पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द हो सकता है, साथ ही पेशाब करते समय जलन या दर्द भी महसूस हो सकता है.
इस समस्या से प्रभावित होने की सबसे अधिक संभावना किसे होता है?

- यह स्थिति बुजुर्ग पुरुषों के साथ-साथ मेनोपॉज के बाद की महिलाओं में भी देखी जाती है.
- यदि परिवार का कोई सदस्य इस स्थिति से पीड़ित है, तो परिवार के अन्य सदस्य भी प्रभावित हो सकते हैं.
- यह अत्यधिक शराब के सेवन के कारण होता है.
- दवाएं लेने वाले व्यक्ति (विशेष रूप से हृदय-संबंधी दवाएं)
- किडनी के रोगी
- हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित
- हाई ब्लड शुगर के पेशेंट
- हाइपोथायरायडिज्म
- मोटापा से ग्रस्त
इस समस्या को कैसे कम किया जा सकता है?
- शराब का सेवन कम करें और स्मोकिंग पूरी तरह से छोड़ दें.
- रोजाना एक्सरसाइज करें.
- शरीर को हाइड्रेटेड रखें.
- मांसाहारी भोजन कम खाएं.
- ताजे फल और सब्जियां खाएं.
- ठंडे पेय पदार्थों जैसी चीजों से दूर रहें.


