Friday, March 20, 2026

पटना में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा।

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पटना में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। चार दिवसीय यह अनुष्ठान सूर्योपासना और षष्ठी देवी की पूजा का प्रतीक है, जो संतान सुरक्षा व समृद्धि देती हैं।

पटना। सनातन परंपरा में प्रत्येक पर्व केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि शास्त्र मत जीवन दर्शन का द्योतक है। चैत्र मास में मनाया जाने वाले चैती छठ इसी परंपरा का विशेष पर्व है। धर्म ग्रंथों में चैत्र मास को सृष्टि का आरंभ माना गया है।

यह काल नवसंवत्सर, नव ऊर्जा और नव संकल्प का प्रतीक है। ऐसे में सूर्योपासना एवं षष्ठी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है।

ज्योतिष आचार्य पंडित राजनाथ झा ने बताया कि लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा। ऋग्वेद में सूर्य को सृष्टि का केंद्र बताया गया है। अस्ताचल एवं उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा इसी वैदिक भावना की अभिव्यक्ति है

षष्ठी देवी को संतान सुरक्षा और समृद्धि की अधिष्ठात्री माना गया है। सूर्यपोसाना की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। प्रदेश के मिथिला एवं पूर्वांचल में लोक आस्था का पर्व श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। छठ महापर्व हमें अनुशासन, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक संतुलन का संदेश देता है।

नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय अनुष्ठान होगा आरंभ:

चैती छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान चैत्र शुक्ल चतुर्थी रविवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ होगा। ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि चैत्र शुक्ल चतुर्थी रविवार को भरणी नक्षत्र व वैधृति याेग में व्रती नहाय-खाय करेंगे।

इस दिन व्रती गंगा स्नान करने के साथ भगवान भास्कर को पूजन करने के साथ प्रसाद के रूप में अरवा चावल, कद्दू की सब्जी, चने का दाल आदि ग्रहण करेंगे।

23 मार्च सोमवार को कृत्तिका नक्षत्र व सर्वार्थ सिद्धि याेग में व्रती पूरे दिन निराहार रह कर शाम में खरना का पूजा कर गुड़, दूध और चावल से निर्मित खीर प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे।

खरना का प्रसाद ग्रहण करने के साथ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ हो जाएगा। चैत्र शुक्ल षष्ठी 24 मार्च मंगलवार को रोहिणी नक्षत्र व प्रीति योग में अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। इसके बाद 25 मार्च को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पारण कर चार दिवसीय अनुष्ठान को पूर्ण करेंगी।

तिथिदिनपर्व का चरण
22 मार्चरविवारनहाय-खाय
23 मार्चसोमवारखरना
24 मार्चमंगलवारसायंकालीन अर्घ्य
25 मार्चबुधवारउदयकालीन अर्घ्य व पारण

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