Friday, March 20, 2026

ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील के संकेतों से कच्चे तेल की कीमतें 3% गिरीं, जिससे भारतीय शेयर बाजार में 1000 अंकों की तेजी आई.

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मुंबई: वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए आज का दिन राहत भरा रहा. अमेरिका द्वारा ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने के संकेतों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. इस खबर ने न केवल वैश्विक तेल बाजार को ठंडा किया, बल्कि भारतीय शेयर बाजार में भी जोरदार बढ़त का संचार किया.

कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के एक हालिया बयान ने बाजार का रुख बदल दिया. बेसेंट ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन समुद्र में मौजूद लगभग 14 करोड़ (140 मिलियन) बैरल ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर विचार कर सकता है. उन्होंने फॉक्स बिजनेस नेटवर्क को दिए साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका वैश्विक कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लचीला रुख अपना रहा है और ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की उसकी कोई योजना नहीं है.

बाजार के ताजा आंकड़े
इस घोषणा के बाद बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा 3.39 प्रतिशत गिरकर 104.96 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर आ गया. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 3.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 92.47 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले 21 दिनों से जारी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण जो ‘रिस्क प्रीमियम’ बढ़ा था, वह अब धीरे-धीरे कम हो रहा है.

भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर असर
भारत अपनी जरूरत का करीब 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में यह कमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक है. तेल की कीमतों में गिरावट की खबर आते ही मुंबई शेयर बाजार (BSE) का सेंसेक्स करीब 1,000 अंक (1.34%) उछल गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 300 अंकों की बढ़त के साथ 1.38 प्रतिशत ऊपर ट्रेड करता नजर आया.

हालांकि, जानकारों का कहना है कि राहत के बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं. 2 मार्च को कच्चा तेल 77.74 डॉलर पर था, जो 19 मार्च तक 108.65 डॉलर तक पहुंच गया था. यानी कीमतों में अभी भी पिछले महीने की तुलना में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि बनी हुई है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है.

फिलहाल बाजार की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हैं. यदि 140 मिलियन बैरल तेल बाजार में आता है, तो यह वैश्विक आपूर्ति की कमी को काफी हद तक पूरा कर सकता है

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