मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार, 19 मार्च 2026 का दिन ‘ब्लैक थर्सडे’ साबित हुआ. मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच घरेलू शेयर बाजारों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 2,496.89 अंक (3.26%) गिरकर 74,207.24 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 भी 775.65 अंक (3.26%) की भारी गिरावट के साथ 23,002.15 के स्तर पर आ गया.
बाजार में गिरावट के मुख्य कारण
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादल
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में डर पैदा कर दिया है. ईरान के एक प्रमुख एलएनजी (LNG) प्लांट पर हमले की खबरों के बाद कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सीधा खतरा है.
HDFC बैंक का संकट
इंडेक्स के दिग्गज ‘HDFC बैंक’ के शेयरों में 8% की भारी गिरावट आई. बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया. अकेले इस बैंक की गिरावट ने निफ्टी और सेंसेक्स को नीचे खींचने में बड़ी भूमिका निभाई.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है, लेकिन महंगाई को लेकर उनकी सख्त टिप्पणी ने संकेत दिया है कि निकट भविष्य में दरों में कटौती की संभावना कम है. इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से पैसे निकालना शुरू कर दिया है.
निवेशकों को भारी नुकसान
बाजार की इस सुनामी में निवेशकों की संपत्ति को भारी चोट पहुंची है. बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन एक ही दिन में करीब 15 लाख करोड़ रुपये घट गया. बाजार में डर का पैमाना माना जाने वाला ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) भी 22% उछलकर 22.80 के स्तर पर पहुंच गया, जो आने वाले दिनों में और अधिक अस्थिरता का संकेत है.
सेक्टर का हाल
बाजार में चौतरफा बिकवाली रही. सबसे ज्यादा मार बैंकिंग, ऑटो और आईटी सेक्टर पर पड़ी. निफ्टी बैंक, निफ्टी ऑटो और निफ्टी आईटी इंडेक्स 3% से 5% तक टूट गए. केवल ओएनजीसी (ONGC) और कोल इंडिया जैसे एनर्जी शेयरों में मामूली बढ़त देखी गई, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से उन्हें फायदा होने की उम्मीद है.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें.


