देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाता, HDFC बैंक के लिए गुरुवार का दिन बेहद उथल-पुथल भरा रहा. बैंक के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे की खबर ने शेयर बाजार में हड़कंप मचा दिया. इस खबर के प्रभाव से शुरुआती कारोबार में HDFC बैंक के शेयर 8.66 प्रतिशत तक टूटकर ₹770 के स्तर पर आ गए, जो इसका नया 52-सप्ताह का निचला स्तर है.
इस्तीफे की वजह: ‘नैतिक मूल्यों’ का टकराव
अतनु चक्रवर्ती ने बुधवार, 18 मार्च 2026 को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफा पत्र ने बैंकिंग सेक्टर में हलचल पैदा कर दी है. चक्रवर्ती ने स्पष्ट रूप से ‘व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता’ का हवाला देते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने बैंक के भीतर कुछ ऐसी कार्यप्रणालियां और घटनाएं देखी हैं, जो उनके सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके इस्तीफे का कोई अन्य छिपा हुआ कारण नहीं है.
निवेशकों को ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का फटका
इस इस्तीफे का सीधा असर बैंक के मार्केट कैपिटलाइजेशन पर पड़ा. शेयरों में आई इस बड़ी गिरावट के कारण निवेशकों को लगभग 1.03 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है. घरेलू बाजार खुलने से पहले ही अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टेड बैंक के ADR में 7% से अधिक की गिरावट देखी गई थी, जिसने आज की बड़ी बिकवाली का संकेत पहले ही दे दिया था. निफ्टी बैंक इंडेक्स और मुख्य निफ्टी इंडेक्स पर भी इस गिरावट का गहरा दबाव देखा जा रहा है.
बैंक की सफाई और अंतरिम नियुक्ति
बाजार में मचे शोर के बीच HDFC बैंक ने आधिकारिक बयान जारी कर सफाई दी है. बैंक का कहना है कि चेयरमैन और बोर्ड के बीच मतभेद ‘नैतिक मूल्यों’ को लेकर नहीं, बल्कि ‘कामकाज के तरीके और निर्णयों को लागू करने’ की प्रक्रिया को लेकर थे. बैंक ने मैनेजमेंट और CEO के बीच किसी भी तरह के ‘पावर स्ट्रगल’ (सत्ता संघर्ष) की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है.
स्थित को संभालने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक ने केकी मिस्त्री को 19 मार्च से तीन महीने की अवधि के लिए बैंक का अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है.
चेयरमैन का इस तरह के गंभीर आरोपों के साथ पद छोड़ना बैंक की ‘कॉर्पोरेट गवर्नेंस’ (निगमित शासन) पर सवाल खड़े करता है. विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में RBI इस मामले की गहराई से जांच कर सकता है.


