चैत्र नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना, मंगलवारी जुलूस, महाअष्टमी और रामनवमी की तिथियां बेहद खास हैं. जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इन दिनों का धार्मिक महत्व
इस वर्ष 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्र का शुभारंभ हो चुकी है. इस दिन सुबह 6:40 बजे तक अमावस्या रहने के बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो चुकी है. प्रतिपदा तिथि के क्षय होने के कारण इसी दिन कलश स्थापना की जाएगी. हालांकि पूरे दिन स्थापना संभव है, लेकिन प्रातःकाल को सबसे शुभ माना गया है. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:32 से 12:21 बजे तक रहेगा, जो स्थापना के लिए उत्तम समय है.
तीन मंगलवारी जुलूस का विशेष महत्व
रांची में रामनवमी से पहले इस बार तीन मंगलवारी जुलूस निकलेंगे. पहला 10 मार्च, दूसरा 17 मार्च और तीसरा 24 मार्च को आयोजित होगा. इन जुलूसों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है.
बेलवरण और महासप्तमी की पूजा
24 मार्च को बेलवरण का आयोजन होगा, जो मां दुर्गा के छठे स्वरूप की पूजा का दिन है. इस दिन शाम 6:54 बजे तक षष्ठी तिथि रहेगी, इसलिए इससे पहले अनुष्ठान करना श्रेष्ठ रहेगा. 25 मार्च को महासप्तमी है, इस दिन मां के सातवें स्वरूप की पूजा की जाएगी और पंडालों में विधिवत आराधना शुरू होगी. शाम 4:30 बजे तक सप्तमी रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि लग जाएगी.
महाअष्टमी और महानवमी का महत्व
26 मार्च को महाअष्टमी का व्रत रखा जाएगा. इस दिन दोपहर 2:15 बजे तक अष्टमी तिथि रहेगी, इसके बाद नवमी लग जाएगी. इसी दिन संधि पूजा और संधि बलि का विशेष महत्व होता है. 27 मार्च को महानवमी मनाई जाएगी और इसी दिन रामनवमी का पर्व भी मनाया जाएगा.
रामनवमी 27 मार्च को, जानें शुभ समय
रामनवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी. इस दिन दोपहर 12:02 बजे तक नवमी तिथि रहेगी, साथ ही मध्याह्न काल में पुनर्वसु नक्षत्र का योग बन रहा है. वाराणसी पंचांग के अनुसार नवमी सुबह 5:56 बजे से शाम 5:12 बजे तक रहेगी, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है.
दशमी और मां का आगमन-गमन
28 मार्च को दशमी तिथि रहेगी, जो सुबह 10:06 बजे तक मान्य है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन डोली पर और गमन मुर्गा पर हो रहा है, जो विशेष संकेत देता है.


