चैत्र अमावस्या के दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना बहुत शुभ और फलदायक माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान नारायण की कृपा साधक पर बनी रहती है. यहां भगवान विष्णु के 4 शक्तिशाली मंत्रों की जानकारी दी गई है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को चैत्र अमावस्या कहा जाता है. यह दिन आध्यात्मिक शुद्धि, पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. चैत्र अमावस्या के दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की आराधना का विशेष विधान है. मान्यता है कि इस दिन श्रीहरि के मंत्रों का जाप करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
भगवान विष्णु के शक्तिशाली मंत्र
अमावस्या के दिन शांत चित्त से इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए:
1. विष्णु मूल मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
महत्व: इसे ‘मुक्ति मंत्र’ भी कहा जाता है. यह मंत्र नकारात्मक कर्मों को नष्ट करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है.
2. विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि. तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
महत्व: बुद्धि की शुद्धि और जीवन में सही मार्ग चुनने की प्रेरणा के लिए इस मंत्र का जाप अचूक माना जाता है.
3. शांत स्वरूप मंत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
महत्व: भय से मुक्ति और जीवन में स्थिरता प्राप्त करने के लिए इस स्तुति का पाठ करना फलदायी होता है.
4. मंगल मंत्र
मङ्गलं भगवान विष्णुः, मङ्गलं गरुड़ध्वजः।
मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
महत्व: कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और शुभता की प्राप्ति के लिए इसका जाप किया जाता है.
चैत्र अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि की गणना इस प्रकार है:
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 18 मार्च 2026, सुबह 08:25 बजे से
- अमावस्या तिथि समाप्त: 19 मार्च 2026, सुबह 06:52 बजे तक
- स्नान-दान की तिथि: उदया तिथि के अनुसार 19 मार्च 2026 (गुरुवार) को चैत्र अमावस्या मनाई जाएगी
- पितृ तर्पण: 18 मार्च को दोपहर (अपराह्न काल) से पितृ तर्पण किया जाएगा


