Tuesday, March 17, 2026

 सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती बढ़त गंवाकर लाल निशान में आए.

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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी अस्थिरता देखने को मिली. घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी ने लगातार दूसरे सत्र में सकारात्मक शुरुआत की, लेकिन पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण शुरुआती बढ़त जल्द ही गायब हो गई.

शुरुआती कारोबार का हाल
मंगलवार सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों में उत्साह देखा गया. एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के दम पर बीएसई सेंसेक्स पिछले बंद के मुकाबले 323.82 अंक या 0.42% की बढ़त के साथ 75,826.68 पर खुला. वहीं, एनएसई निफ्टी 85 अंक या 0.36% की तेजी के साथ 23,493.20 के स्तर पर शुरू हुआ.

उतार-चढ़ाव का दौर
हालांकि, यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी. शुरुआती कारोबार के कुछ ही मिनटों के भीतर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया. सेंसेक्स अपने ऊपरी स्तर से फिसलकर 75,422.73 अंक पर आ गया, जो 80 अंकों की गिरावट दर्शाता है. निफ्टी भी 20 अंक गिरकर 23,389.15 के स्तर पर कारोबार करने लगा.

सेक्टोरल प्रदर्शन: आईटी और बैंकिंग में गिरावट
बाजार को नीचे खींचने में सबसे बड़ी भूमिका आईटी शेयरों की रही. निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.83% की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा ऑटो, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी और ऑयल एंड गैस सेक्टर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे. दूसरी ओर, मीडिया, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 0.24% तक की मामूली बढ़त देखी गई.

विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन के बाद अब इजरायल-इरान संघर्ष ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है. ‘एनरिच मनी’ के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, वैश्विक मैक्रो कारकों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते बाजार में अभी सतर्कता का माहौल रहेगा.

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के आकाश शाह ने बताया कि बाजार वर्तमान में एक तकनीकी रिकवरी के दौर से गुजर रहा है. उनके अनुसार, निफ्टी के लिए 23,500–23,600 का स्तर एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस (रुकावट) ज़ोन है. यदि निफ्टी इस स्तर के ऊपर टिकने में कामयाब होता है, तो आगे और बढ़त देखी जा सकती है, अन्यथा 23,250–23,300 के स्तर पर सहारा (सपोर्ट) मिल सकता है.

कच्चे तेल और मुद्रास्फीति का डर
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतें हैं. ब्रेंट क्रूड फिलहाल 103 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है. यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे भारत में महंगाई (मुद्रास्फीति) बढ़ने का खतरा पैदा हो जाएगा.

फिलहाल भारतीय बाजार ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है. जहां एक ओर जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंग सेंग 3% तक की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं, वहीं भारतीय निवेशक स्थानीय चुनौतियों और कच्चे तेल की सप्लाई चेन को लेकर चिंतित हैं.

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