Tuesday, March 17, 2026

केंद्र सरकार ने 2026-27 से गेहूं और धान खरीद पर आढ़तियों और सहकारी समितियों का कमीशन बढ़ाकर पंजाब-हरियाणा में ₹50.75 प्रति क्विंटल कर दिया है.

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश के कृषि क्षेत्र और अनाज खरीद प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में आढ़तियों (कमीशन एजेंटों) और सहकारी समितियों के कमीशन की दरों में वृद्धि को मंजूरी दे दी है. यह निर्णय विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जहाँ गेहूं और धान की सरकारी खरीद में आढ़तियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है.

संशोधित दरें और प्रभावी समय
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, नई दरें 2026-27 के रबी विपणन सत्र (RMS) से प्रभावी होंगी. सरकार ने यह कदम राज्य सरकारों की लगातार मांग और भारतीय खाद्य निगम (FCI) व राज्य प्रतिनिधियों वाली एक उप-समिति की सिफारिशों के आधार पर उठाया है.

किसे कितना फायदा मिलेगा?
संशोधित संरचना के तहत कमीशन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है:

  • पंजाब और हरियाणा के आढ़ती: गेहूं की खरीद पर इन्हें अब 50.75 रुपये प्रति क्विंटल का कमीशन मिलेगा, जो पहले 46.00 रुपये था.
  • राजस्थान के आढ़ती: यहां गेहूं पर कमीशन 41.40 रुपये से बढ़कर 45.67 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है.
  • धान की खरीद: धान पर कमीशन को 45.88 रुपये से बढ़ाकर 50.61 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है.
  • सहकारी समितियां: गेहूं की खरीद पर इनका कमीशन 27.00 रुपये से बढ़ाकर 29.79 रुपये और धान पर 32.00 रुपये से बढ़ाकर 35.30 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है.

आधुनिक साइलो और भविष्य की रणनीति
सरकार ने अपनी नीति को स्पष्ट करते हुए कहा है कि आधुनिक साइलो में होने वाली खरीद पर मंडी में लागू दर का 50 प्रतिशत कमीशन ही देय होगा. यह कदम भंडारण के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है.

प्रभाव और महत्व
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य खरीद प्रणाली की दक्षता को बनाए रखना और उन एजेंसियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है जो सरकार की ओर से खरीद कार्यों को सुगम बनाती हैं. आढ़ती न केवल किसानों और सरकार के बीच एक कड़ी का काम करते हैं, बल्कि वे मंडियों में सफाई, तुलाई और लोडिंग जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं का प्रबंधन भी करते हैं.

यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब रबी फसलों की कटाई और खरीद का सीजन जोर पकड़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि कमीशन बढ़ने से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी.

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