Saturday, March 14, 2026

गर्भवती माताओं, फिटस और नवजात शिशुओं के ओवरऑल डेवलपमेंट के लिए विटामिन D3 को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसकी कमी से कई हेल्थ प्रोब्लेम्स…

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चाहे वह गर्भस्थ शिशु हो या नवजात, उनके फिजिकल और मेंटल डेवलपमेंट के लिए उचित पोषण (जिसमें प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन और ओमेगा-3 शामिल हैं) बेहद जरूरी है. विटामिन D3 ऐसा ही एक पोषक तत्व है, इसकी कमी से गर्भ में पल रहे शिशु और नवजात, दोनों के लिए कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इस विटामिन की कमी से गर्भस्थ शिशु का विकास बाधित हो सकता है और यहां तक कि नवजात की शारीरिक विकास भी रुक सकती है. आज की रिपोर्ट में, हम वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. लतिका जोशी से यह समझने की कोशिश करेंगे कि विटामिन D की कमी प्रेग्नेंट महिलाओं, गर्भस्थ शिशुओं और नवजात के हेल्थ पर किस तरह असर डाल सकती है…

गर्भावस्था में विटामिन डी की कमी का गर्भस्थ शिशु और मां पर क्या असर पड़ता है?
नेशनल हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को रोजाना 15 माइक्रोग्राम विटामिन D की जरूरत होती है. वहीं, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान विटामिन D की कमी से महिलाओं में प्री-एक्लेम्पसिया और समय से पहले जन्म जैसी कॉम्प्लिकेशन्स का खतरा बढ़ जाता है.

Vitamin D3 is crucial for the physical and mental development of fetuses and newborns

डॉ. लतिका जोशी बताती हैं कि भारत में, बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं में विटामिन D की कमी देखी जाती है. विटामिन D की कमी न केवल गर्भवती मां के स्वास्थ्य पर असर डालती है, बल्कि इसका गर्भ में पल रहे बच्चे के डेवलपमेंट और हेल्थ पर भी बुरा असर पड़ सकता है. असल में, विटामिन D मां और शिशु दोनों के शरीर में कैल्शियम और फॉस्फेट जैसे कई जरूरी पोषक तत्वों का सही लेवल बनाए रखने में मदद करता है, ये पोषक तत्व बच्चे के मेंटल और फिजिकल डेवलपमेंट के लिए बहुत जरूरी होते हैं.

डॉ. लतिका आगे बताती हैं कि अगर किसी गर्भवती महिला में विटामिन D की कमी होती है, तो गर्भ में पल रहे बच्चे को जरूरत से कम कैल्शियम मिलेगा. नतीजतन, इसका बच्चे के पूरे विकास पर बुरा असर पड़ता है, जिसमें उसके दांतों और हड्डियों का बनना भी शामिल है. अगर यह कमी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो बच्चे को रिकेट्स भी हो सकता है.

नवजात पर विटामिन D की कमी का प्रभाव
जब किसी नवजात को किसी भी कारण से पर्याप्त मात्रा में विटामिन D नहीं मिल पाता, तो उनके शरीर में विटामिन D का लेवल कम होने लगता है. इसका सीधा असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है. डॉ. लतिका बताती हैं कि विटामिन D एक ऐसा पोषक तत्व है जो शरीर को भोजन से मिलने वाले कैल्शियम और फॉस्फेट को सोखने में मदद करता है. कैल्शियम, फॉस्फेट और विटामिन D मिलकर हड्डियों को बनाने और उन्हें मजबूत बनाने का काम करते हैं. इसके अलावा, विटामिन D दिल की सेहत बनाए रखने, संक्रमणों से लड़ने और हड्डियों से जुड़ी बीमारियों को रोकने में भी अहम भूमिका निभाता है.

Vitamin D3 is crucial for the physical and mental development of fetuses and newborns

विटामिन D की कमी के लक्षण
विटामिन D की कमी के लक्षण माताओं और बच्चों में अलग-अलग हो सकते हैं. कुछ आम लक्षणों में शामिल हैं…

  • मांसपेशियों में कमजोरी
  • फिजिकल डेवलपमेंट का ठीक से न होना.
  • जल्दी थक जाना
  • चिड़चिड़ापन
  • दौरे पड़ना
  • हड्डियों का ठीक से विकास न होना
  • हड्डियों में दर्द महसूस होना
  • सिर की हड्डियां नरम होना
  • बैठने या रेंगने में देरी

विटामिन D की कमी को कैसे दूर करें
डॉ. लतिका बताती हैं कि विटामिन D की कमी के खतरे को देखते हुए, आजकल ज्यादातर डॉक्टर नवजात शिशुओं को विटामिन D3 सप्लीमेंट देने की सलाह देते हैं. इसी तरह, गर्भवती महिलाओं को भी गर्भावस्था के दौरान विटामिन D3 सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा, विटामिन D की कमी को नेचुरल तरीकों से भी दूर किया जा सकता है, जैसा कि…

Vitamin D3 is crucial for the physical and mental development of fetuses and newborns

सूरज की रोशनी: सूरज की रोशनी विटामिन D का सबसे अच्छा नेचुरल सोर्स है, जो बोन हेल्थ और मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए आवश्यक है. हालांकि, आधुनिक अपार्टमेंट कल्चर, प्रदूषण और सीमित आउटडोर गतिविधियों के कारण, बच्चों और माताओं को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती, जिससे विटामिन D की कमी एक आम समस्या बन गई है. ऐसे में बच्चों में विटामिन D की कमी को रोकने और मजबूत हड्डियों के विकास के लिए उन्हें सुबह 6 से 9 बजे के बीच या सुबह की हल्की धूप में कुछ देर बिना कपड़ों के या कम कपड़ों में लिटाना या तेल मालिश करना फायदेमंद होता है. बता दें, धूप से मिलने वाली UV-B किरणें त्वचा में विटामिन D का निर्माण करती हैं. हालांकि, ज्यादा गर्मी से बचने और स्किन के रंग के आधार पर समय को समायोजित करने की आवश्यकता हो सकती है.

खान-पान के जरिए: नई मां या गर्भवती महिलाओं में विटामिन D की कमी को खान-पान के जरिए भी दूर किया जा सकता है. आम तौर पर, विटामिन D3 मुख्य रूप से मांसाहारी भोजन स्रोतों में पाया जाता है. शाकाहारी विकल्पों की बात करें तो, विटामिन D3 मशरूम, पनीर, दूध, दही, जूस और कुछ खास तरह के फोर्टिफाइड अनाज में पाया जा सकता है.

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