पटना में गैस आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता से हॉस्टल और होटल संचालक परेशान हैं। लगभग 3000 हॉस्टल और ढाई लाख छात्र प्रभावित हो सकते हैं। सिलेंडरों की कमी, ब्लैक मार्केटिंग और ऊंचे दामों की शिकायतें हैं, जिससे किचन संचालन मुश्किल हो रहा है।
पटना। राजधानी पटना में गैस आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता की चर्चा के बीच हॉस्टल और होटल संचालक परेशान नजर आ रहे हैं। गैस सिलेंडर मिलने में दिक्कत की शिकायतों के कारण कई जगह किचन संचालन प्रभावित हो रहा है। हॉस्टल संचालकों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो उन्हें बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। शहर में करीब तीन हजार हॉस्टल इस समस्या से प्रभावित होने की बात कही जा रही है। इसका असर लगभग ढाई लाख छात्रों पर पड़ सकता है जो इन हॉस्टलों में रहते हैं। वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि जिले में एलपीजी की कोई कमी नहीं है
हॉस्टलों में खाना बनाना बना चुनौती
पटना के गांधी नगर, बोरिंग रोड और आसपास के इलाकों में कई हॉस्टल गैस संकट की बात कर रहे हैं। संचालकों का कहना है कि बच्चों को दिन में तीन समय भोजन देना होता है, इसलिए किचन बंद करना संभव नहीं है।
कुछ हॉस्टलों में फिलहाल स्टॉक में रखे सिलेंडरों से काम चलाया जा रहा है। लेकिन आगे सिलेंडर मिलेंगे या नहीं, इसे लेकर चिंता बनी हुई है।
कुछ संचालकों का दावा है कि बाजार में सिलेंडर महंगे दाम पर मिल रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के लिए 2200 से 2300 रुपये तक देने पड़ रहे हैं।
ब्लैक में सिलेंडर मिलने की शिकायत
कई हॉस्टल संचालकों का कहना है कि एजेंसियों से नियमित बुकिंग नहीं हो पा रही है। उनके मुताबिक कुछ जगहों पर सिलेंडर ब्लैक में बेचे जाने की भी शिकायतें सामने आ रही हैं।
हालांकि प्रशासन ने इस तरह की गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। हॉस्टल संचालकों का कहना है कि हर महीने 20 से 22 सिलेंडर की जरूरत पड़ती है।
लेकिन हाल में ऑर्डर देने पर बहुत कम सिलेंडर ही मिल पाए हैं। इससे मेस संचालन पर दबाव बढ़ गया है।
कोयला, लकड़ी और इंडक्शन का सहारा
गैस की कमी की आशंका को देखते हुए कई हॉस्टल वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी कर रहे हैं। कुछ जगहों पर इंडक्शन चूल्हे और बिजली से खाना बनाने की योजना बनाई जा रही है।
कई संचालकों ने कोयले और लकड़ी के चूल्हे भी तैयार रखे हैं। संचालकों का कहना है कि छात्राओं और छात्रों को भूखा नहीं रखा जा सकता।
इसलिए किसी भी तरह से भोजन की व्यवस्था करनी ही होगी। हॉस्टल बंद करना फिलहाल अंतिम विकल्प माना जा रहा है
होटलों में भी दिख रहा असर
गैस की कमी की चर्चा का असर पटना के बड़े होटलों पर भी दिखाई दे रहा है। कई होटल फिलहाल बड़े ऑर्डर लेने से बच रहे हैं।
किचन में गैस का इस्तेमाल सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ होटलों में इंडक्शन और कोयले के चूल्हे का इस्तेमाल बढ़ाया गया है।
एक बड़े होटल के स्टाफ के अनुसार उनके पास सिर्फ एक से दो दिन का बैकअप बचा है। इस वजह से किचन संचालन को लेकर सतर्कता बरती जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय हालात से जुड़ी बताई जा रही वजह
विशेषज्ञों के अनुसार मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। फारस की खाड़ी से गुजरने वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के कई देशों तक पहुंचते
हालिया तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग पर जोखिम बढ़ने की चर्चा है। इसी वजह से तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई पर दबाव की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि इसका स्थानीय स्तर पर कितना असर पड़ेगा, यह स्पष्ट नहीं है। फिलहाल स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
प्रशासन बोला- एलपीजी की कोई कमी नहीं
पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने गैस की कमी की खबरों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जिले में सभी गैस कंपनियों के पास पर्याप्त एलपीजी उपलब्ध है।
बुकिंग और डिलीवरी की प्रक्रिया पहले की तरह जारी है। लोगों से घबराकर गैस की बुकिंग नहीं करने की अपील की गई है।
प्रशासन ने ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी रोकने के लिए छापेमारी के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों को गैस एजेंसियों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है।


