Friday, March 13, 2026

आज शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ.

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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन ‘ब्लैक फ्राइडे’ साबित हुआ. मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों सहित दलाल स्ट्रीट पर भी भारी डर का माहौल पैदा कर दिया. चौतरफा बिकवाली के चलते बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी करीब 2 प्रतिशत तक लुढ़क कर बंद हुए.’

आज के कारोबार के अंत में, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,470.50 अंक (1.93%) गिरकर 74,563.92 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 488.05 अंक (2.06%) की बड़ी गिरावट के साथ 23,151.10 पर आकर थमा. इस भारी गिरावट के कारण महज एक दिन में निवेशकों की करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई.

सेक्टर और शेयरों का हाल
बाजार में आज बिकवाली इतनी हावी थी कि सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल दो— भारती एयरटेल और हिंदुस्तान यूनिलीवर ही हरे निशान में बंद हो पाए. सबसे ज्यादा मार मेटल और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर पर पड़ी. निफ्टी मेटल इंडेक्स में लगभग 5% की गिरावट देखी गई.

टाटा स्टील, एलएंडटी (L&T), एसबीआई (SBI), मारुति सुजुकी और एक्सिस बैंक आज के टॉप लूजर्स में शामिल रहे. स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स भी 2.5% से ज्यादा टूटकर बंद हुए.

गिरावट के मुख्य कारण
भू-राजनीतिक तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने निवेशकों के मन में अनिश्चितता पैदा कर दी है. युद्ध की स्थिति में तेल और गैस की सप्लाई चेन बाधित होने का बड़ा डर है.

कच्चे तेल की कीमतें: सप्लाई रुकने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो भारत जैसे आयात प्रधान देश के लिए नकारात्मक संकेत है.

रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 92.48 पर पहुंच गया, जिससे विदेशी निवेशकों (FIIs) ने बाजार से पैसा निकालना तेज कर दिया.

फियर इंडेक्स (India VIX): बाजार में घबराहट को मापने वाला इंडेक्स ‘इंडिया विक्स’ आज 6.32% उछलकर 22.88 पर पहुंच गया, जो तेज अस्थिरता का संकेत है.

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए अब 23,100 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट (सहारा) के रूप में देखा जा रहा है. यदि तनाव और बढ़ता है, तो बाजार और नीचे जा सकता है. ऊपर की ओर 23,450–23,500 का स्तर अब एक कड़ा प्रतिरोध (रेसिस्टेंस) बन गया है. निवेशकों को फिलहाल नई खरीदारी से बचने और वैश्विक स्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है.

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