ज्योतिष शास्त्र में ‘देवगुरु’ बृहस्पति का विशेष महत्व है. सुख, समृद्धि, ज्ञान और सौभाग्य के कारक माने जाने वाले गुरु ग्रह जल्द ही अपनी चाल बदलने वाले हैं. 11 मार्च 2026 को गुरु मिथुन राशि में मार्गी (सीधी चाल) होने जा रहे हैं. पिछले कुछ महीनों से वक्री (उल्टी चाल) चल रहे गुरु के सीधी चाल में आते ही कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने शुरू हो जाएंगे.
वक्री से मार्गी होने का अर्थ
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, जब कोई ग्रह वक्री होता है, तो उसके शुभ फलों में कमी आती है या कार्यों में देरी होती है. गुरु के मार्गी होने का अर्थ है कि अब जातकों को उनके प्रयासों का पूरा फल मिलेगा. विशेष रूप से करियर, विवाह और धन के मामलों में रुकी हुई प्रगति फिर से शुरू होगी.
किन राशियों के लिए खुलेगा किस्मत का ताला?
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए गुरु का मार्गी होना वरदान साबित हो सकता है. आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी. यदि आप लंबे समय से किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, तो अब उसमें सफलता मिलने का समय है. नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति और वेतन वृद्धि के योग बन रहे हैं.
मिथुन राशि
चूंकि गुरु आपकी ही राशि में मार्गी हो रहे हैं, इसलिए सबसे अधिक प्रभाव आप पर ही पड़ेगा. मानसिक तनाव कम होगा और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार आएगा. सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा और नए प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनेंगे जो भविष्य में लाभकारी सिद्ध होंगे.
वृषभ राशि
आर्थिक दृष्टिकोण से यह समय शानदार रहने वाला है. निवेश किए गए धन से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है. पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझ सकते हैं. परिवार में किसी मांगलिक कार्य का आयोजन हो सकता है.
तुला राशि
भाग्य का पूरा साथ मिलने से आपके बिगड़े हुए काम बनने लगेंगे. धार्मिक यात्राओं के योग हैं. छात्रों के लिए यह समय विशेष रूप से फलदायी है, प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है.
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों के लिए गुरु की सीधी चाल संतान पक्ष से शुभ समाचार लाएगी. रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को नई पहचान मिलेगी. प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी और विवाह के इच्छुक जातकों की बात बन सकती है.
गुरु को मजबूत करने के उपाय
जिन जातकों की कुंडली में गुरु कमजोर स्थिति में हैं, उन्हें इस अवधि में विशेष लाभ के लिए कुछ उपाय करने चाहिए:
- गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा करें और पीली वस्तुओं (जैसे केला, चने की दाल) का दान करें.
- माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं.
- ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: बृहस्पतये नम:’ मंत्र का जाप करें.
11 मार्च से होने वाला यह परिवर्तन ब्रह्मांडीय ऊर्जा में बड़ा बदलाव लाएगा. गुरु 2 जून 2026 तक इसी स्थिति में रहेंगे, जिसके बाद वे कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. तब तक का समय योजनाएं बनाने और उन्हें लागू करने के लिए अति उत्तम है.


