नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ. वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के कारण घरेलू बाजार में सुनामी जैसा मंजर देखा गया. प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के लाखों करोड़ों रुपये डूब गए.
सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही बाजार में बिकवाली का दबाव देखा गया. सुबह लगभग 10:45 बजे, सेंसेक्स 2,130.72 अंक की भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. वहीं, निफ्टी लगभग 677 अंक नीचे फिसल गया. बाजार की यह गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं थी; बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 75 प्रतिशत शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे.
बिकवाली का आलम यह था कि 200 से अधिक शेयरों में ‘लोअर सर्किट’ लग गया, जिसका मतलब है कि उन शेयरों में केवल बिकवाल थे और खरीदार गायब थे. इसके अलावा, लगभग 728 शेयरों ने अपने 52-हफ्ते का सबसे निचला स्तर (52-week low) छू लिया, जो बाजार में गहरी निराशा को दर्शाता है.
गिरावट के पीछे के मुख्य कारण
बाजार की इस तबाही के पीछे मुख्य रूप से मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को खतरे में डाल दिया है. विशेष रूप से कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों ने भारतीय बाजार के सेंटिमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव पड़ता है.
विशेषज्ञ की चेतावनी: ‘बाय ऑन डिप्स’ का समय खत्म
आमतौर पर जब बाजार गिरता है, तो सलाहकार ‘बाय ऑन डिप्स’ (गिरावट में खरीदारी) की सलाह देते हैं. लेकिन इस बार बाजार विशेषज्ञों का सुर बदला हुआ है. शेयर बाजार विशेषज्ञ अंबरीश बलिगा ने निवेशकों को आगाह करते हुए कहा है कि अब स्थिति ‘इंतजार करो और देखो’ की हो गई है.
बलिगा ने बताया कि खाड़ी देशों में पानी के अलवणीकरण संयंत्रों जैसे नागरिक ठिकानों पर हमलों की रिपोर्टें आ रही हैं. उन्होंने कहा, “जब युद्ध सैन्य ठिकानों से निकलकर आम जनता और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने लगे, तो अनिश्चितता चरम पर पहुंच जाती है. ऐसे माहौल में निवेशकों का डरना स्वाभाविक है और बाजार इसी डर को प्रतिबिंबित कर रहा है.”
क्या बाजार ने निचला स्तर छू लिया है?
अंबरीश बलिगा के अनुसार, मौजूदा हालात में यह कहना बेहद मुश्किल है कि बाजार और कितना नीचे जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सामान्य बाजार सुधार (Correction) नहीं है. यह एक ऐसा संकट है जो सीधे मानवीय जीवन और व्यवसायों को प्रभावित कर रहा है. जब तक स्थिति में स्पष्टता नहीं आती या राजनयिक समाधान नहीं निकलता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी.
सेक्टर का हाल: डिफेंस और ऑयल शेयरों में अस्थायी चमक
बाजार की इस चौतरफा गिरावट के बीच रक्षा और तेल एवं गैस सेक्टर के कुछ शेयरों में हल्की बढ़त देखी गई. हालांकि, विशेषज्ञों ने इसे ‘सेंटिमेंट ड्रिवेन’ यानी भावनाओं से प्रेरित बढ़त बताया है. उनका मानना है कि अगर युद्ध और भड़कता है, तो इन सेक्टरों की तेजी भी टिक नहीं पाएगी.
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
बाजार के जानकारों का कहना है कि मौजूदा अनिश्चितता के दौर में ताजी पूंजी लगाने से बचना चाहिए. निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे:
- जल्दबाजी न करें: बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें.
- कैश बचाकर रखें: जब तक वैश्विक शांति की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठता, तब तक नकदी बचाना ही समझदारी है.
- अफवाहों से बचें: पैनिक में आकर अच्छे पोर्टफोलियो को पूरी तरह खाली न करें, लेकिन नई बड़ी खरीदारी से भी बचें.
पिछले सप्ताह भी बाजार दबाव में था, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग 2.9% की गिरावट आई थी. लेकिन सोमवार की इस भारी गिरावट ने यह संकेत दे दिया है कि निवेशकों को अब और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है.


