Saturday, February 28, 2026

सेंसेक्स 961 अंक गिरा और निफ्टी 25,178 पर बंद हुआ.

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मुंबई: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जिससे निवेशकों को करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

बाजार का हाल
कारोबार के अंत में बीएसई (BSE) सेंसेक्स 961 अंक या 1.17 प्रतिशत गिरकर 81,287 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई (NSE) निफ्टी 317.90 अंक या 1.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,178 के स्तर पर आ गया. बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा, जिसमें मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1.10 प्रतिशत तक टूट गए.

गिरावट के मुख्य कारण
FII की बिकवाली: विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट को बिगाड़ दिया है.

वैश्विक तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता में प्रगति न होने से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है. इसके अलावा, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी संघर्ष ने भी निवेशकों को सतर्क कर दिया है.

कमजोर वैश्विक संकेत: अमेरिकी बाजारों में अनिश्चितता और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम होने से वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ गया है.

रुपये में कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपया 0.02 प्रतिशत कमजोर होकर 90.98 के स्तर पर पहुंच गया, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव दिखा.

सेक्टोरल प्रदर्शन
आज के कारोबार में आईटी, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को छोड़कर लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे. सबसे ज्यादा मार रियल्टी सेक्टर (-2.26%) और ऑटो सेक्टर (-1.86%) पर पड़ी. मेटल और एफएमसीजी इंडेक्स में भी 1.69 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. हालांकि, पिछले दिनों की गिरावट के बाद आईटी शेयरों में कुछ खरीदारी दिखी, जिससे बाजार को थोड़ा सहारा मिला.

विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी ने 25,350 का महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ दिया है, जो निकट भविष्य में और कमजोरी का संकेत है. इंडिया विक्स (India VIX) में 2.6% की वृद्धि निवेशकों के बीच घबराहट को दर्शाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रमों, विदेशी फंडों के प्रवाह और आगामी व्यापक आर्थिक आंकड़ों (Macro Data) पर निर्भर करेगी. बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए निवेशक फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपना रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं.

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