Saturday, March 21, 2026

अमेरिकी टैरिफ के झटके से सोलर शेयर धराशायी; वारी एनर्जीज 15% टूटा, विक्रम सोलर 7%, वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज 6%, सोलेक्स एनर्जी में 5% की गिरावट

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मुंबई: अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और पैनल पर लगभग 126% (125.87%) की प्रारंभिक ‘काउंटरवेलिंग ड्यूटी’ (CVD) लगाने के फैसले ने भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मचा दिया है. बुधवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय सोलर और नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई.

शेयरों का हाल: वारी और प्रीमियर एनर्जीज को सबसे बड़ी चोट
बाजार खुलते ही निवेशकों ने घरेलू सोलर दिग्गजों में जमकर बिकवाली की. देश की सबसे बड़ी सोलर मॉड्यूल निर्माता वारी एनर्जीज का शेयर 14.6% तक गोता लगाकर 2,580.50 रुपये के ‘लोअर सर्किट’ पर जा लगा. हालांकि, बाद में मामूली रिकवरी के साथ यह ₹2,724 के स्तर पर कारोबार करता दिखा.

हाल ही में लिस्ट हुई प्रीमियर एनर्जीज भी इस झटके से नहीं बच सकी. कंपनी का शेयर इंट्रा-डे के दौरान 12% से ज्यादा टूटकर 666.90 रुपये तक गिर गया. अन्य कंपनियों में विक्रम सोलर 7%, वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज 6%, और सोलेक्स एनर्जी में 5% की गिरावट देखी गई.

क्या है अमेरिकी फैसले का आधार?
यह कार्रवाई ‘अलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड’ की याचिका पर की गई है, जिसमें First Solar जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. अमेरिका का आरोप है कि भारत, इंडोनेशिया और लाओस जैसे देश अपनी कंपनियों को भारी सरकारी सब्सिडी दे रहे हैं, जिससे अमेरिकी निर्माताओं को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है.

अमेरिका ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि इंडोनेशिया पर 104.38% और लाओस पर 80.67% की सब्सिडी दरें तय की हैं. 2025 में अमेरिका के कुल सोलर आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा (करीब $4.5 बिलियन) इन्हीं तीन देशों से आया था.

अगला खतरा: एंटी-डंपिंग ड्यूटी और ‘ट्रंप’ टैरिफ
भारतीय कंपनियों के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं. वाणिज्य विभाग मार्च में यह फैसला लेगा कि क्या ये देश उत्पादन लागत से कम कीमत पर उत्पाद बेच रहे हैं. यदि यह साबित होता है, तो कंपनियों पर अतिरिक्त एंटी-डंपिंग ड्यूटी भी लगाई जा सकती है.

इसके साथ ही, ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से भारत पर 10% अस्थायी टैरिफ पहले ही लागू कर दिया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे आने वाले हफ्तों में धारा 232 और 301 जैसे कड़े व्यापारिक कानूनों का उपयोग कर सकते हैं, जिससे निर्यात और महंगा हो सकता है.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन टैरिफ के कारण भारतीय कंपनियों की निर्यात आय पर गंभीर असर पड़ेगा, जो उनके मुनाफे को प्रभावित कर सकता है.

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