Sunday, March 22, 2026

ईवाई रिपोर्ट के अनुसार 2026 में भारतीय वेतन में 9.1% वृद्धि होगी.

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नई दिल्ली: भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक उत्साहजनक खबर सामने आई है. प्रमुख परामर्शदाता फर्म ईवाई (EY) द्वारा सोमवार को जारी ‘फ्यूचर ऑफ पे’ (Future of Pay) रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारतीय कंपनियों में औसत वेतन वृद्धि 9.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है. यह रिपोर्ट दर्शाती है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापारिक जगत में मजबूती बनी हुई है.

सेक्टर-वार प्रदर्शन: GCC सबसे आगे
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, वेतन वृद्धि के मामले में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) सबसे आगे रहने वाले हैं, जहाँ 10.4 प्रतिशत की भारी वृद्धि की संभावना है. वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में लगभग 10 प्रतिशत, ई-कॉमर्स में 9.9 प्रतिशत और फार्मास्युटिकल्स (जीवन विज्ञान) क्षेत्र में 9.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है. रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी दहाई अंक में वृद्धि देखी जा सकती है.

बदल रहा है वेतन का ढांचा
रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनियां अब पारंपरिक वेतन ढांचे को पीछे छोड़ रही हैं. अब सालाना बढ़ोतरी केवल पद या अनुभव पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि ‘कौशल और प्रदर्शन’ को मुख्य पैमाना बनाया जा रहा है. लगभग 50 प्रतिशत कंपनियां अब कौशल-आधारित वेतन प्रणाली (Skill-based pay) अपना रही हैं. एआई (AI), मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे डिजिटल कौशलों के लिए कंपनियां 30 से 40 प्रतिशत तक का प्रीमियम देने को तैयार हैं.

नौकरी छोड़ने की दर में गिरावट
कर्मचारियों के व्यवहार में भी एक सकारात्मक बदलाव देखा गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर (Attrition Rate) 2024 के 17.5 प्रतिशत से घटकर 2025 में 16.4 प्रतिशत रह गई है. राहत की बात यह है कि नौकरी छोड़ने वाले 80 प्रतिशत कर्मचारी अपनी मर्जी से बेहतर अवसरों के लिए बदलाव कर रहे हैं, न कि किसी दबाव में.

ईवाई इंडिया के विशेषज्ञ अभिषेक सेन ने कहा कि भारत में अब वेतन का भविष्य केवल सालाना बढ़ोतरी के प्रतिशत से तय नहीं होगा. कंपनियां अब रणनीतिक रूप से यह तय कर रही हैं कि किस कौशल में निवेश करना है और किन परिणामों के लिए प्रोत्साहन देना है.

कुल मिलाकर, ईवाई की यह रिपोर्ट 16 क्षेत्रों की 178 कंपनियों के विश्लेषण पर आधारित है, जो एक स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाला वर्ष भारतीय कार्यबल के लिए ‘स्किल-अप’ होने और बेहतर रिवॉर्ड पाने का वर्ष होगा.

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