आईडीएफसी बैंक ने खुलासा किया है कि हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में 590 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी हुई है. बैंक के अनुसार, इस मामले में उसके कुछ कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत सामने आई है. यह गड़बड़ी जाली भौतिक चेक के माध्यम से की गई.
बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) V. Vaidyanathan ने निवेशकों और विश्लेषकों के साथ बातचीत में कहा कि बैंक ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और आवश्यक प्रावधान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस घटना का बैंक की लाभप्रदता पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि शुद्ध ब्याज आय में सुधार और ऋण लागत में कमी से बैंक की स्थिति मजबूत बनी हुई है.
490 करोड़ रुपये मिलान के दौरान पकड़े गए
बैंक के मुताबिक, कुल 590 करोड़ रुपये की गड़बड़ी में से 490 करोड़ रुपये खातों के मिलान (रिकंसिलिएशन) के दौरान सामने आए, जबकि अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये आंतरिक जांच में चिन्हित किए गए. प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान आकलन के अनुसार इस राशि में आगे किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है.
केपीएमजी करेगा फोरेंसिक ऑडिट
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बैंक ने वैश्विक सलाहकार कंपनी KPMG को नियुक्त किया है. फोरेंसिक ऑडिट चार से पांच सप्ताह में पूरा होने की उम्मीद है. बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और नियामक संस्थाओं तथा लेखा परीक्षकों को भी सूचित किया है. साथ ही बैंकिंग प्रणाली में वसूली और ‘लियन-मार्किंग’ की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसके तहत संदिग्ध खातों में राशि अस्थायी रूप से फ्रीज की जाती है.
हरियाणा सरकार ने किया डी-एम्पैनल
घटना के बाद Government of Haryana ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और AU Small Finance Bank को सरकारी कार्यों की सूची से बाहर कर दिया है. हालांकि, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने किसी भी प्रकार की अनियमितता से इनकार किया है.
बैंक ने बताया कि 590 करोड़ रुपये की यह राशि हरियाणा सरकार से जुड़े कुल जमा का लगभग 0.5 प्रतिशत है. वहीं, केंद्र और राज्य सरकारों से जुड़ी कुल जमाएं बैंक के कुल जमा आधार का लगभग 8 से 10 प्रतिशत हैं. इस घटनाक्रम के बाद शेयर बाजार में बैंक के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. बैंक प्रबंधन का कहना है कि यह मामला किसी प्रणालीगत त्रुटि का नहीं, बल्कि एक विशेष इकाई और ग्राहक समूह तक सीमित है.


