रांची: झारखंड में जिला, प्रखंड और पुलिस स्थापना समितियों में अब तक जनप्रतिनिधियों को शामिल नहीं किए जाने को लेकर बड़ा सवाल उठा है. प्रश्नकाल के दौरान JLKM विधायक जयराम महतो द्वारा उठाए गए सवाल पर सरकार ने विधानसभा में लिखित जवाब दिया है.
विधायक जयराम महतो ने पूछा कि बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के बाद राज्य में गठित राज्य स्तरीय, जिला एवं प्रखंड स्तरीय स्थापना समितियों और पुलिस स्थापना समितियों में अब तक जनप्रतिनिधियों को क्यों शामिल नहीं किया गया, जबकि देश के कई अन्य राज्यों में ऐसी समितियों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित है. जयराम महतो ने पूछा कि जब विकास के कार्यों की निगरानी के लिए जिला और प्रखंड स्तर पर बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति में जनप्रतिनिधि अध्यक्ष और सदस्य हो सकते हैं तो प्रशासनिक स्थानांतरण और पदस्थापन समितियों से बाहर रखने की क्या वजह है.
सरकार का लिखित जवाब
मामले पर प्रभारी मंत्री दीपक बिरूआ की ओर से दिए गए लिखित जवाब में कहा गया कि झारखंड कार्यपालिका नियमावली, 2000 के तहत गठित स्थापना समितियों में जनप्रतिनिधियों को शामिल करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. उन्होंने कहा कि कर्मियों के स्थानांतरण, पदस्थापन और प्रतिनियुक्ति के लिए विभागों में विभागीय स्थापना समिति गठित है. अब तक इस दिशा में कोई नियम या ठोस विचार प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई है. हालांकि, यदि अन्य राज्यों में ऐसी व्यवस्था लागू है, तो झारखंड सरकार इस विषय पर विचार कर सकती है.
दूसरे राज्यों से रिपोर्ट तलब
सरकार ने यह भी बताया कि कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा कुछ अन्य राज्यों से इस संबंध में प्रतिवेदन मंगाया गया है, ताकि उनकी व्यवस्था का अध्ययन किया जा सके. सरकार के इस जवाब के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल स्थापना समितियों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को लेकर कोई तत्काल फैसला नहीं होना है. लेकिन भविष्य में इस पर नीतिगत विचार की संभावना से इनकार भी नहीं किया गया है.


