नई दिल्ली: भारत में आजकल क्रिकेट और एआई को लेकर काफी चर्चाएं चल रही हैं. भारत में इस वक्त एक ओर, क्रिकेट का टी20 वर्ल्ड कप चल रहा है, तो दूसरी ओर इंडिया एआई इंपैक्ट समिट भी चल रहा है. इस मौके पर गूगल ने शानदार चौका मार दिया है. गूगल ने नई दिल्ली में चल रहे एआई समिट में एक एआई क्रिकेट कोच लॉन्च किया है.
नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे इस एआई समिट में गूगल के पवेलियन में एआई क्रिकेट कोचिंग का नज़ारा देखने को मिला. गूगल ने अपना एआई बेस्ड क्रिकेट कोच पेश किया. गूगल का यह एआई कोच न सिर्फ बल्लेबाजी की कमियों को पहचानता है, बल्कि उसी वक्त उन गलतियों को सुधारने के लिए सुझाव भी देता है. गूगल का एआई क्रिकेट कोच एकदम किसी प्रोफेशनल कोच की तरह ही काम करता है.
गूगल के प्रतिनिधियों ने ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए बताया कि इस एआई कोच का मकसद क्रिकेट को ज्यादा आसान और वैज्ञानिक तरीकों से बेहतर बनाना है. उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि देश के किसी भी कोने में मौजूद प्रतिभाशाली खिलाड़ी को सही गाइडेंस मिले, चाहे वहां फिजिकल कोच उपलब्ध हो या नहीं.”
गूगल ने इस एआई सिस्टम के लिए भारत मंडपम के एक्सपो सेंटर में एक खास क्रिकेट पिच तैयार की है. यहां युवा खिलाड़ी बल्लेबाजी कर सकते हैं. जैसे ही खिलाड़ी शॉट खेलता है, पिच के सामने लगे हुए एचडी कैमरे और सेंसर्स, खिलाड़ी के फुटवर्क, हेड पोजिशन, बैलेंस और बैट स्विंग को रिकॉर्ड कर लेते हैं. उसके बाद कुछ ही मिनटों में पिच पर लगी स्क्रीन पर एक डिटेल्ट रिपोर्ट सामने आती है. इस रिपोर्ट में बताया जाता है कि खिलाड़ी ने सही शॉट सिलेक्शन किया है या नहीं, और गेंद की लाइन-लेंथ के हिसाब से कौनसा बेहतर विकल्प हो सकता था. ईटीवी से बातचीच करते हुए गूगल की टेक्निकल टीम ने कहा कि यह सिस्टम फ्रेम-बाय-फ्रेम एनालिसिस करता है, ताकि छोटी से छोटी गलती भी पकड़ में आ सके.

‘जेमिनी’ से जुड़ा क्रिकेट का अनुभव
इस एआई कोच की ताकत गूगल का एडवांस एआई मॉडल जेमिनी (Gemini) है. हाल ही में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने इस टेक्नोलॉजी के बारे में कहा था कि गूगल अब आपकी ‘गुगली’ भी समझने में मदद कर सकता है. गूगल के अधिकारियों ने ईटीवी को बताया कि जेमिनी मॉडल प्लेयर्स के मौजूदा प्रदर्शन की तुलना आईसीसी के ऐतिहासिक डेटा से करता है. यह सिस्टम दिखाता है कि अगर उसी गेंद पर विराट कोहली या सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज खिलाड़ी बल्लेबाजी कर रहे होते, तो वो उस गेंद को कैसे खेलते. इससे युवा खिलाड़ियों को तकनीक और सोच दोनों स्तरों पर सीखने का मौका मिलता है.
दूरदराज इलाकों के लिए बड़ा मौका
आईटी सचिव और वरिष्ठ खेल पत्रकार विक्रम सिंह ने ईटीवी से कहा कि यह टेक्नोलॉजी उन इलाकों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है, जहां प्रोफेशनल कोचिंग की सुविधा नहीं है. उन्होंने कहा, “AI अब सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं है. यह मैदान पर उतर चुका है और गांव-कस्बों के खिलाड़ियों को भी बड़ा मंच देने में मदद कर सकता है.” उनका मानना है कि मोबाइल कैमरे के जरिए मिलने वाली यह कोचिंग युवा खिलाड़ियों के खर्च को भी कम करेगी और प्रतिभा को निखारने का नया रास्ता खोलेगी.
AI कोच की खासियतें
ईटीवी भारत को दिए गए इंटरव्यू में गूगल टीम ने बताया कि यह AI कोच रियल-टाइम एनालिसिस, तकनीकी गलतियों की पहचान, पर्सनलाइज्ड ट्रेनिंग प्लान और मोबाइल आधारित कोचिंग जैसी सुविधाएं देता है. इससे खिलाड़ी अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार कर सकते हैं. टेक्नोलॉजी और खेल का यह मेल आने वाले समय में क्रिकेट ट्रेनिंग की तस्वीर बदल सकता है. AI आधारित कोचिंग न सिर्फ प्रतिभा पहचानने में मदद करेगी, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को भी मजबूत आधार दे सकती है.


