नई दिल्ली: भारतीय रसोइयों के लिए साल 2026 की शुरुआत राहत भरी रही है. CRISIL मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स की ताजा ‘रोटी चावल दर’ रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी महीने में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी और मांसाहारी थाली की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई है.
शाकाहारी और मांसाहारी थाली के दाम गिरे
CRISIL Intelligence की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में एक शाकाहारी थाली की लागत में सालाना आधार पर 1% की कमी आई है. वहीं, मांसाहारी थाली की कीमत में 7% की बड़ी गिरावट देखी गई है. इस गिरावट का मुख्य कारण प्रमुख सब्जियों, दालों और ब्रायलर की कीमतों में कमी आना है.
इन चीजों ने घटाई थाली की कीमत
थाली को सस्ता करने में सबसे बड़ा हाथ प्याज और आलू का रहा है. रिपोर्ट के अनुसार.
- प्याज: बेहतर स्टॉक उपलब्धता और निर्यात में सुस्ती के कारण प्याज के दाम साल-दर-साल 27% गिर गए हैं.
- आलू: पिछले साल की ऊंची कीमतों (High Base) के मुकाबले इस बार आलू के दाम 23% तक कम हुए हैं.
- दालें: दालों की कीमतों में 14% की गिरावट दर्ज की गई. इसका श्रेय सरकार द्वारा चना, पीली मटर और उड़द दाल के भारी आयात को जाता है.
मांसाहारी थाली क्यों हुई ज्यादा सस्ती?
नॉन-वेज थाली की लागत में 7% की कमी का मुख्य कारण ब्रायलर (चिकन) की कीमतों में आया 10% का उछाल (गिरावट) है. चूंकि मांसाहारी थाली की कुल लागत में चिकन का हिस्सा लगभग 50% होता है, इसलिए इसकी कीमतों में कमी का सीधा फायदा उपभोक्ताओं की जेब को मिला.
टमाटर और गैस ने बिगाड़ा स्वाद
हालांकि रिपोर्ट में कुछ चेतावनी भरे संकेत भी दिए गए हैं. टमाटर की कीमतों में 50% की भारी वृद्धि हुई है, जो जनवरी 2025 के ₹31/किलो से बढ़कर जनवरी 2026 में ₹46/किलो पर पहुंच गया. आवक में 39% की कमी के कारण टमाटर के दाम बढ़े हैं, जिसने थाली की लागत में और बड़ी गिरावट को रोक दिया.
इसके अलावा, वैश्विक कारणों से वनस्पति तेल 4% महंगा हुआ है और रसोई गैस की कीमतों में भी 6% की वृद्धि हुई है, जिससे आम आदमी को मिलने वाली कुल राहत थोड़ी सीमित रही.
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषण शर्मा ने कहा कि स्टॉक की बेहतर स्थिति और आयात नीतियों ने दालों और प्याज को नियंत्रण में रखा है. हालांकि, टमाटर की कम आवक और ईंधन की बढ़ती लागत अभी भी बजट पर दबाव बना रही है.


