नई दिल्ली: भारत में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक स्वतंत्र अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ यानी UPI अब भारत में भुगतान का सबसे पसंदीदा माध्यम बन गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कुल भुगतान लेनदेन में UPI की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसने पारंपरिक नकद (Cash) लेनदेन को पीछे छोड़ दिया है. वर्तमान में नकद लेनदेन की हिस्सेदारी घटकर महज 38 प्रतिशत रह गई है.
युवाओं और छोटे व्यापारियों का जबरदस्त भरोसा
वित्त मंत्रालय के ‘वित्तीय सेवा विभाग’ द्वारा जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि UPI की सफलता का मुख्य कारण इसका उपयोग में आसान होना और तुरंत फंड ट्रांसफर करने की क्षमता है. विशेष रूप से 18 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं में डिजिटल भुगतान के प्रति गहरा रुझान देखा गया है, जहाँ 66 प्रतिशत युवा डिजिटल माध्यमों को ही चुन रहे हैं.
सिर्फ ग्राहक ही नहीं, बल्कि व्यापारी भी इसे अपना रहे हैं. देश के 94 प्रतिशत छोटे व्यापारियों ने UPI को अपना लिया है. इनमें से 57 प्रतिशत व्यापारियों का मानना है कि डिजिटल पेमेंट अपनाने के बाद उनकी बिक्री में वृद्धि हुई है. व्यापारियों ने तेजी से भुगतान, बेहतर रिकॉर्ड-कीपिंग और परिचालन की सुविधा को इसकी मुख्य खूबी बताया है.
सरकारी प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे का विस्तार
सरकार ने इस बदलाव को गति देने के लिए भारी निवेश किया है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए 8,276 करोड़ रुपये का बजटीय सहयोग प्रदान किया है. इस राशि का उपयोग बैंकों और भुगतान प्रदाताओं को कम मूल्य वाले डिजिटल लेनदेन (P2M) को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया.
आंकड़े बताते हैं कि कार्यान्वयन अवधि के दौरान डिजिटल लेनदेन में लगभग 11 गुना की वृद्धि हुई है. डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे का विस्तार इस कदर हुआ है कि UPI QR कोड की संख्या 9.3 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ हो गई है. वहीं, UPI प्लेटफॉर्म पर सक्रिय बैंकों की संख्या जो मार्च 2021 में 216 थी, वह मार्च 2025 तक बढ़कर 661 हो गई है.
कैश और ATM पर निर्भरता में कमी
इस डिजिटल बदलाव का सीधा असर नकदी के चलन पर पड़ा है. अध्ययन में पाया गया कि UPI और RuPay कार्ड के उपयोग के बाद 90 प्रतिशत उपभोक्ताओं का डिजिटल भुगतान पर भरोसा बढ़ा है. इसके परिणामस्वरूप, एटीएम (ATM) से पैसे निकालने की आवृत्ति और छोटे मूल्य के नोटों की मांग में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. 52 प्रतिशत उपयोगकर्ताओं ने कैशबैक को प्रोत्साहन माना, जबकि 74 प्रतिशत ने ‘स्पीड’ को सबसे बड़ा फायदा बताया.
NPCI, बैंकों और फिनटेक कंपनियों के समन्वित प्रयासों ने भारत को ‘कम-नकद’ और ‘डिजिटल रूप से सशक्त’ अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूती से खड़ा कर दिया है. यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर डिजिटल भुगतान के मामले में एक अग्रणी शक्ति बन चुका है.


