Saturday, March 14, 2026

RBI के नए नियमों के तहत मिस-सेलिंग रोकने हेतु बैंक स्टाफ को बीमा/म्यूचुअल फंड पर अलग इंसेंटिव नहीं मिलेगा, उल्लंघन पर रिफंड और मुआवजा अनिवार्य होगा.

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मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों में वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री (मिस-सेलिंग) पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम प्रस्तावित किए हैं. केंद्रीय बैंक ने सुझाव दिया है कि बैंक कर्मचारियों को बीमा, म्यूचुअल फंड और अन्य थर्ड पार्टी उत्पाद बेचने पर बाहरी कंपनियों से मिलने वाले किसी भी प्रकार के प्रोत्साहन (इंसेंटिव) पर प्रतिबंध लगाया जाए.

कर्मचारियों को थर्ड पार्टी से नहीं मिलेगा प्रोत्साहन
आरबीआई के ड्राफ्ट संशोधन निर्देशों के अनुसार यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मार्केटिंग या बिक्री से जुड़े कर्मचारियों को किसी भी तीसरे पक्ष से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई प्रोत्साहन न मिले. इसका उद्देश्य ग्राहकों को बिना जरूरत या गलत जानकारी देकर उत्पाद बेचने की प्रवृत्ति को रोकना है.

‘डार्क पैटर्न’ पर भी रोक
केंद्रीय बैंक ने बैंकों की डिजिटल सेवाओं में ‘डार्क पैटर्न’ के इस्तेमाल पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव दिया है. डार्क पैटर्न ऐसे भ्रामक डिजाइन या तरीकों को कहा जाता है, जिनके जरिए ग्राहकों को अनजाने में कोई उत्पाद खरीदने या निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया जाता है. आरबीआई ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और अनुचित व्यापार व्यवहार बताया है.

बंडलिंग पर सख्त निर्देश
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि बैंक अपने उत्पादों के साथ किसी थर्ड पार्टी उत्पाद को अनिवार्य रूप से नहीं जोड़ सकते. यदि किसी बैंक उत्पाद के साथ तीसरे पक्ष का उत्पाद लेना जरूरी हो, तो ग्राहक को उसे किसी अन्य सेवा प्रदाता से खरीदने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए.

मिस-सेलिंग साबित होने पर पूरी राशि वापसी
ड्राफ्ट के मुताबिक, यदि किसी मामले में मिस-सेलिंग साबित होती है तो बैंक को ग्राहक को पूरी राशि वापस करनी होगी और निर्धारित नीति के अनुसार हुए नुकसान की भरपाई भी करनी होगी.

ग्राहक संबंधित वित्तीय नियामक द्वारा तय समयसीमा के भीतर बैंक में शिकायत दर्ज कर सकते हैं. जहां समयसीमा तय नहीं है, वहां ग्राहक शर्तों की हस्ताक्षरित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर शिकायत कर सकते हैं.

फीडबैक और निगरानी व्यवस्था अनिवार्य
आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे बिक्री के 30 दिनों के भीतर ग्राहकों से फीडबैक लें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ग्राहक उत्पाद की विशेषताओं और जोखिमों को समझता है. इस फीडबैक पर आधारित अर्धवार्षिक रिपोर्ट तैयार कर नीतियों की समीक्षा भी की जाएगी. साथ ही, उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए आयोजित प्रतियोगिताएं या लक्ष्य आधारित योजनाएं ऐसी न हों, जो कर्मचारियों को जबरन उत्पाद बेचने के लिए प्रेरित करें.

डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स के लिए आचार संहिता
आरबीआई ने डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स (DSAs) के लिए भी आचार संहिता तय की है. ग्राहकों से फोन या मुलाकात सामान्यतः सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही की जानी चाहिए. इसके बाहर संपर्क करने के लिए ग्राहक की पूर्व सहमति आवश्यक होगी. आरबीआई के इन प्रस्तावित कदमों को बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

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