नई दिल्ली: आम बजट 1 फरवरी 2026 को पेश होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी दो अहम खबरों ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है. ये दोनों खबरें वेनेजुएला से जुड़ी हैं, जिनका सीधा असर वैश्विक सप्लाई और निवेश माहौल पर पड़ा है. नतीजतन शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि इससे एक दिन पहले गुरुवार को कीमतों में करीब 3 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई थी.
पहली बड़ी खबर अमेरिका के उस फैसले से जुड़ी है, जिसमें उसने वेनेजुएला के कच्चे तेल सेक्टर पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है. दूसरी खबर वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के फैसले से संबंधित है, जिसके तहत देश के तेल क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का रास्ता साफ किया गया है. इन दोनों घटनाओं से बाजार को यह संकेत मिला कि आने वाले समय में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव
शुक्रवार सुबह कारोबार शुरू होते ही कच्चे तेल के वायदा भाव में गिरावट देखी गई. सुबह करीब 9.56 बजे ब्रेंट क्रूड का अप्रैल वायदा भाव 1.54 प्रतिशत गिरकर 68.52 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का मार्च वायदा 1.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.33 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया.
घरेलू बाजार की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी दिखी. फरवरी डिलीवरी वाला कच्चा तेल वायदा 1.61 प्रतिशत गिरकर 5,935 रुपये प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा, जबकि पिछला बंद भाव 6,032 रुपये था. वहीं मार्च वायदा 5,926 रुपये प्रति बैरल पर ट्रेड हुआ.
वेनेजुएला में निजी निवेश के लिए रास्ता साफ
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने 29 जनवरी को एक नए कानून पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत देश के तेल क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को मंजूरी दी गई है. लंबे समय से आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहे वेनेजुएला के लिए यह फैसला निवेश बढ़ाने और उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
अमेरिका की राहत से बढ़ेगी सप्लाई की उम्मीद
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने वेनेजुएला सरकार और उसकी सरकारी तेल कंपनी PDVSA से जुड़े कुछ लेन-देन को मंजूरी दी है. इनमें वेनेजुएला में उत्पादित तेल की लोडिंग, निर्यात, बिक्री, दोबारा बिक्री, भंडारण, परिवहन और मार्केटिंग जैसे कार्य शामिल हैं. इसके अलावा, अमेरिकी कंपनियों द्वारा वेनेजुएला के तेल की रिफाइनिंग की भी अनुमति दी गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे आयात बिल पर कुछ हद तक नियंत्रण संभव हो सकता है.


