धनबाद: गोल्ड और चांदी की आसमान छूती कीमतों एवं अनियंत्रित बाजार व्यवस्था के विरोध में स्वर्णकार कारीगर संघ ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है. भारत सरकार से गोल्ड कंट्रोल एक्ट और एक्साइज ड्यूटी लागू करने, सोना-चांदी को शेयर मार्केट से बाहर रखने और व्यापारियों एवं कारीगरों के पास सीमित मात्रा में ही कीमती धातु रखने का नियम लागू करने की मांग की गई है. जिसे लेकर धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर दो दिवसीय निर्जला उपवास शुरू किया गया है.
रेडीमेड सोने-चांदी के आभूषणों की अवैध तस्करी
आंदोलन कर रहे स्वर्णकार कारीगरों का कहना है कि गोल्ड कंट्रोल एक्ट और एक्साइज ड्यूटी समाप्त होने के बाद, देश के अलग-अलग राज्यों से रेडीमेड सोने-चांदी के आभूषणों की अवैध तस्करी बढ़ गई है. इसका सीधा असर स्थानीय कारीगरों पर पड़ा है, जिन्हें अब पहले की तरह काम नहीं मिल पा रहा है.
कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट
इधर, कारीगरों ने बताया कि परंपरागत रूप से हाथ से आभूषण बनाने वाले लाखों स्वर्णकार, आज बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं. हालात इतने गंभीर हैं कि कई कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और वे भूखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं. आंदोलन के जरिए सरकार और आम जनता को यह चेतावनी दी जा रही है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं.
गोल्ड कंट्रोल एक्ट एवं एक्साइज ड्यूटी को लागू करने की मांग
स्वर्णकार कारीगर संघ ने केंद्र सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सोना-चांदी के कारोबार को नियंत्रित करने के लिए गोल्ड कंट्रोल एक्ट और एक्साइज ड्यूटी को फिर से लागू किया जाए, ताकि अवैध कारोबार पर रोक लग सके और पारंपरिक कारीगरों को संरक्षण मिल सके.
बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घरानों का बढ़ा दखल: चंद्रशेखर अग्रवाल
इस दौरान धरनास्थल पर पहुंचे पूर्व मेयर एवं संभावित महापौर प्रत्याशी चंद्रशेखर अग्रवाल ने स्वर्णकारों के आंदोलन को सही ठहराया. उन्होंने कहा कि कभी आशंका जताई जाती थी कि बड़े कारोबारी, छोटे दुकानदारों को खत्म कर देंगे और आज वही स्थिति सामने आ रही है. बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घरानों के बढ़ते दबदबे के कारण मोहल्लों और गलियों में दिखने वाली पारंपरिक सोना-चांदी की दुकानें धीरे-धीरे बंद होती जा रही हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस गंभीर समस्या पर हस्तक्षेप करने की मांग की है.


