ब्रह्मांड के न्यायधीश और कर्मफल दाता शनि देव जल्द ही अपना नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 21 मार्च 2026, शनिवार को शाम 04:00 बजे शनि देव उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण में प्रवेश करेंगे. शनि का यह गोचर अत्यंत प्रभावशाली होगा क्योंकि शनि एक मंद गति से चलने वाला ग्रह है जिसका प्रभाव स्थायी और गहरा होता है.
शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं. हालांकि शनि का प्रभाव हर राशि पर अलग होता है, लेकिन इस विशेष नक्षत्र परिवर्तन का नकारात्मक प्रभाव मुख्य रूप से मेष, कर्क, तुला और मकर राशियों पर देखा जा सकता है.
प्रभावित राशियों का विस्तृत विश्लेषण
1. मेष राशि (Aries): आत्मविश्वास और सेहत की चुनौती
मेष राशि के जातकों के लिए शनि का प्रथम भाव में प्रभाव मानसिक अशांति पैदा कर सकता है. इस दौरान जातकों में आत्मविश्वास की कमी और निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बनी रहेगी. क्रोध और जल्दबाजी में लिए गए फैसले भारी वित्तीय नुकसान करा सकते हैं. स्वास्थ्य के मोर्चे पर सावधानी बरतें; विशेषकर अनिद्रा और मानसिक तनाव से बचने के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाएं.
2. कर्क राशि (Cancer): करियर और कार्यक्षेत्र में बढ़ेगा दबाव
कर्क राशि वालों के लिए यह गोचर भावनात्मक रूप से कठिन हो सकता है. कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ मतभेद या राजनीति का सामना करना पड़ सकता है. जिम्मेदारियों का अतिरिक्त बोझ आपको थका सकता है. इस समय धैर्य और संयम ही आपका सबसे बड़ा हथियार है. विवादों से दूरी बनाए रखें और शांत रहकर काम निपटाएं.
3. तुला राशि (Libra): रिश्तों और व्यापार में सावधानी
शनि का सप्तम भाव में गोचर तुला राशि के जातकों के वैवाहिक जीवन और व्यावसायिक साझेदारी को प्रभावित करेगा. व्यापारिक लेन-देन या कागजी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें. जीवनसाथी के साथ संवादहीनता के कारण छोटे विवाद बड़े झगड़ों का रूप ले सकते हैं. इस समय प्रतिक्रिया देने के बजाय दूसरों की बात सुनना बेहतर होगा.
4. मकर राशि (Capricorn): पारिवारिक कलह और मानसिक चिंता
मकर राशि के जातकों के लिए पारिवारिक स्थितियां चुनौतीपूर्ण रह सकती हैं. परिवार के बुजुर्गों, विशेषकर माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ सकती है. घर में पुराने विवाद फिर से उभर सकते हैं, जिससे मानसिक शांति भंग होने की आशंका है. शांति बनाए रखने के लिए घर और बाहर के कामों के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य होगा.
निष्कर्ष और उपाय
ज्योतिषाचार्य डॉ. मिश्र के अनुसार, शनि के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए इन राशि वालों को शनिवार के दिन शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए और छाया दान करना चाहिए. कर्मों की शुचिता और असहायों की मदद से शनि देव की कृपा प्राप्त की जा सकती है.


